Dhammapada Gatha-
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Sarkari Yojana 2026
धम्मपद गाथा- नासमझ, मूढ़, मूर्ख मनुष्य अपना शत्रु स्वयं बनता है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ. एम एल परिहार परिचय- जयपुर, राजस्थान. Dhammapada Gatha- A mindless, foolish, foolish (ignorant) man becomes his own enemy.…
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धम्मपद गाथा- आचरण में उतरे तो ही सफल वाणी अन्यथा भाषण, प्रवचन, उपदेश व्यर्थ है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ. एम एल परिहार परिचय- जयपुर, राजस्थान. Dhammapada Gatha- Speech is successful only if it comes into practice, otherwise…
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धम्मपद गाथा- बुद्धों का श्रावक अपनी प्रज्ञा से जग में प्रकाशमान होता है; भीड़ को चीरकर पार करने की उसमें क्षमता और योग्यता होती है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ. एम एल परिहार यथा सकरधानस्मिं, उज्झितस्मि महापथे। पदुम तत्थ जायेथ, सुचिगन्धं मनोरमं।। (Dhammapada Gatha – The…
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धम्मपद गाथा- जागने वाले को रात लंबी लगती है. थके हुए के लिए यात्रा लंबी हो जाती है. ऐसे ही अज्ञानी के लिए संसार भवचक्र लंबा होता है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ.एम एल परिहार परिचय- जयपुर, राजस्थान. The night seems long to the one who is awake. The journey becomes…
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धम्मपद गाथा- न चंदन की न चमेली की, न जूही की न बेला की, शील (सदाचार) की सुगंध सर्वोत्तम है; सज्जनों की सुगंध हवा के विपरीत दिशा में भी बहती है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ एम एल परिहार परिचय- जयपुर, राजस्थान. न पुप्फगन्धो पटिवातमेति, न चन्दनं तगरमल्लिका वा। सतञ्च गन्धो पटिवातमेति, सब्बा दिसा…
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धम्मपद गाथा- दूसरों के दोषों का लेखा-जोखा मत रखो. दूसरों की सिर्फ निंदा, आलोचना, प्रतिक्रिया में रस मत लो. यह पतन का मार्ग है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन
©डॉ. एम एल परिहार परिचय- जयपुर, राजस्थान. दूसरों के दोषों का लेखा-जोखा मत रखो. दूसरों की सिर्फ निंदा, आलोचना,…
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