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बेरोजगारी, महंगाई पर यात्रा ले निकले, हिंदुत्व और सावरकर पर अटके; कितने कामयाब राहुल गांधी | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

नई दिल्ली | [नेशनल बुलेटिन] | राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा एक बार फिर विवादों में घिर चुकी है। सवाल पैदा होता है कि महंगाई और बेरोजगारी को लेकर शुरू गई भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी कहीं अपने मकसद से भटक तो नहीं गए हैं? क्या इस यात्रा के मूल मुद्दों को भूलकर राहुल गांधी केवल सावरकर, भाजपा विरोध और हिंदुत्व पर ही अटक गए हैं?

 

महाराष्ट्र में सावरकर के ऊपर की गई उनकी टिप्पणी ने नई मुसीबत पैदा कर दी है। एक तरफ भाजपा उनके ऊपर हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोगी दलों ने सावरकर पर राहुल के बयान से किनारा कर लिया है।

 

भारत जोड़ो यात्रा के मकसद से भटके?

 

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की वेबसाइट पर जाएं तो इसमें लिखा है कि 7 सितंबर से शुरू होने वाली यह यात्रा 150 दिनों तक चलेगी। इस दौरान 12 राज्यों में 3500 किमी की दूरी तय करेगी। इसके साथ ही यह भी लिखा है कि यात्रा का मकसद भारत को जोड़ना है। यात्रा के दौरान बेरोजगारी और महंगाई के बारे में बात होगी। इससे इतर शुरुआत से ही भारत जोड़ो यात्रा विवादों के घेरे में है। जिस तरह से यात्रा में विवाद हुए हैं, हिंदुत्व, सावरकर और भाजपा पर हमले हुए, उससे तो यही लगता है कि मानो राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा का मकसद ही भूल गए हैं।

 

माना यह भी जा रहा था कि इस यात्रा से राहुल गांधी का इमेज मेकओवर होगा और वह बतौर नेता मजबूत होकर उभरेंगे। लेकिन भारत जोड़ो यात्रा से उपजे विवादों पर नजर डालें तो यह राहुल के लिए अपेक्षाओं से इतर नजर आता है।

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कांग्रेस ने ही सुलगाई विवाद की चिंगारी

 

बड़े जोर-शोर से शुरू की गई भारत जोड़ो यात्रा में विवाद की चिंगारी सबसे पहले खुद कांग्रेस ने ही सुलगाई। 12 सितंबर को कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया। इस ट्वीट में आरएसएस की खाकी नेकर को जलता हुआ दिखाया जाता है। इसके साथ ही कांग्रेस और राहुल गांधी के ऊपर भाजपा और आरएसएस का हमला तेज हो जाता है। इस विवाद से शुरू हुई चर्चा ने भारत जोड़ो यात्रा के उस इंपैक्ट पर असर डाला, जिसके तहत माना जा रहा था कि वह मुद्दों को उठाकर एक मजबूत विपक्ष के तौर पर खुद को तैयार करेगी।

 

सावरकर पर हमला पहली बार नहीं

 

राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के लिए जिस भी शहर में पहुंचे उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई की बातें तो कीं, लेकिन भाजपा पर सियासी हमले से नहीं चूके। होना तो यह चाहिए था कि वह केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला करते और खुद को मजबूत विपक्षी नेता साबित करते। इसके बजाए उनके सवाल सियासी अधिक रहे। कभी भाजपा की हिंदुत्व थियरी पर तो कभी सावरकर पर। कहना गलत नहीं होगा कि इस तरह वह भारत जोड़ो यात्रा के उस मूल मकसद से ही दूर होते गए, जो उनकी वेबसाइट पर लिखा गया है।

 

गुरुवार को महाराष्ट्र में उन्होंने सावरकर के लिए जो बोला, उस पर कांग्रेस की परेशानी बढ़नी तय है। वैसे, यह पहली बार नहीं है जब राहुल ने सावरकर पर हमला बोला है। अक्टूबर में जब राहुल कर्नाटक में थे उन्होंने कहा कि कि मेरी समझ में सावरकर को अंग्रेजों से वजीफा मिलता था। इसे ऐतिहासिक तथ्य बताते हुए उन्होंने कहा था कि भाजपा इसे छुपा नहीं सकती।

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