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समझें कैसे; जीत के साथ अरविंद केजरीवाल को टेंशन भी दे गए MCD के नतीजे | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

नई दिल्ली | [नेशनल बुलेटिन] | दिल्ली में पिछले 8 साल से सत्ता में काबिज अरविंद केजरीवाल ने अब नगर निगम का शासन भी हासिल कर लिया है। एमसीडी में भाजपा के 15 साल की सत्ता को खत्म करके जीत दर्ज की है। 15 साल के कांग्रेस का शासन खत्म करके विधानसभा में बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ने अब तक दोपहर 2 बजे तक आप 126 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है तो बीजेपी के खाते में 97 सीटें गईं हैं। कांग्रेस 7 और निर्दलीय 3 सीटों पर विजयी हुए हैं।

 

हालांकि, जीत की खुशी के साथ एमसीडी के नतीजे अरविंद केजरीवाल को टेंशन भी दे गए हैं। केजरीवाल के दो सबसे अहम मंत्रियों मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इलाके में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री सिसोदिया और जैन के इलाके में भाजपा ने लगभग सूपड़ा साफ कर दिया है। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के क्षेत्र में भी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

 

मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज में 4 वार्ड हैं। भाजपा ने इसमें से 3 वार्ड में जीत हासिल की है तो ‘आप’ को महज एक सीट से संतोष करना पड़ा है। जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन के क्षेत्र शकूरबस्ती की तीनों सीटों पर भाजपा ने कमल खिला दिया है। नजफगढ़ से विधायक कैलाश गहलोत भी चार में से महज एक वार्ड में ‘आप’ को जीत दिला पाए हैं। यहां 3 वार्ड में भाजपा को जीत मिली है।

 

आरोपों से घिरे हैं तीनों मंत्री

 

खास बात है कि केजरीवाल सरकार के तीनों ही मंत्रियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग केस में जहां स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन जेल में बंद हैं तो शिक्षा और आबकारी विभाग संभालने वाले मनीष सिसोदिया पर भी भाजपा ने घोटाले के आरोप लगाए हैं।

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कथित शराब घोटाले में सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। वहीं, कैलाश गहलोत पर भी बस खरीद में घोटाले के आरोप लगाए गए हैं।

 

ब्रैंडिंग पर चोट?

 

केजरीवाल के लिए तीनों मंत्रियों के क्षेत्र में खराब प्रदर्शन इसलिए भी चिंता की बात होगी क्योंकि दिल्ली सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कामकाज के नाम पर ही अपनी ब्रैंडिंग करती है। केजरीवाल अक्सर दावा करते हैं कि उनकी सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम किया है।

 

दूसरी तरफ भाजपा इन मंत्रियों पर घोटाले के आरोप लगाकर घेरने की कोशिश करती है। ऐसे में इन मंत्रियों के क्षेत्र में ‘आप’ की हार से ना सिर्फ भाजपा का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उसे हमलावर होने का एक और मौका मिलेगा।

 

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