और ये ज़माना कहता है…

©गायकवाड विलास

परिचय- मिलिंद महाविद्यालय लातूर, महाराष्ट्र


 

रोटी ने किया मजबूर और ग़रीबी ने छीन लिया बचपन,

और ये ज़माना कहता है की, ग़रीबी में संस्कारों की कमी है।

 

हाथों में किताबें लेने की उम्र में,हम रोटी के लिए तरस रहे थे,

ऐसे हालातों में हम औरों के किताबें भी कबाड़ख़ाने में बेच रहे थे।

 

ये बुराईयां मां ओ की कोख से ही पैदा हुई नहीं है,

ये पेट की आग ही अच्छाई को भी बुराईयों में बदल देती है।

 

गरीबों की बस्तियों को ही ये ज़माना बुरी नजरों से देखता है,

मगर देखो कभी कीचड़ की दल-दल में ही वो कमल का फूल खिलता है।

 

जिन्हें हर दिन मिलती नहीं रोटी,वो किताबें क्या खरीद लायेंगे,

जिन्हें मिलता नहीं हर दिन रोजगार,वो क्या पाठशाला की ओर जायेंगे?

 

रोटी ने किया मजबूर और ग़रीबी ने छीन लिया बचपन,

और ये ज़माना कहता है बुराईयों से ही भरा है ये हमारा आंगन।

 

 

? सोशल मीडिया

 

फेसबुक पेज में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://www.facebook.com/onlinebulletindotin

 

व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/Cj1zs5ocireHsUffFGTSld

 

ONLINE bulletin dot in में प्रतिदिन सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाएं, परीक्षा पाठ्यक्रम, समय सारिणी, परीक्षा परिणाम, सम-सामयिक विषयों और कई अन्य के लिए onlinebulletin.in का अनुसरण करते रहें.

 

? अगर आपका कोई भाई, दोस्त या रिलेटिव ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन में प्रसारित किए जाने वाले सरकारी भर्तियों के लिए एलिजिबल है तो उन तक onlinebulletin.in को जरूर पहुंचाएं।

 

ये खबर भी पढ़ें:

भारतीय डाकघर में निकली चालक पदों में सीधी भर्ती | Indian Post Office Driver Jobs Bharti 2023

 


Check Also
Close
Back to top button