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उत्तराखंड के कलाकार आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होकर हैं उत्साहित, कहा छत्तीसगढ़ सरकार की तरह दूसरे प्रदेशों को लेनी चाहिए सीख | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

रायपुर | [धर्मेंद्र गायकवाड़] | राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में दूसरे दिन भाग लेने वाले कलाकारों में उत्तराखंड के आदिवासी कलाकार भी शामिल हुए। नृत्य महोत्सव में उन्होंने उत्तराखंड के लोक-नृत्य हारुल की प्रस्तुति दी। उत्तराखंड के जौनसार जनजातियों के द्वारा यह नृत्य किया जाता है। लोककथाओं पर आधारित इस नृत्य के माध्यम से पांडवों के शौर्यगान किया जाता है।

 

2 नवंबर को दी गई इस प्रस्तुति में उत्तराखंड के इन कलाकारों ने मंच पर ही नृत्य के दौरान अपने सिर पर केतली रखकर चाय तैयार की। इसके अलावा जौनसार जनजातियों द्वारा प्रस्तुत इस नृत्य में हाथी पर बैठे एक व्यक्ति ने अस्त्र के माध्यम से कला का प्रदर्शन किया। नृत्य के दौरान उपयोग किए गए इस हाथी को कलाकारों ने अपने हाथ से तैयार किया था।

 

हारूल नृत्य प्रस्तुत करने वाले उत्तराखंड के इन कलाकारों ने बातचीत के दौरान बताया कि- छत्तीसगढ़ में आकर वे बहुत ही उत्साहित हैं। टीम के लीडर नंदलाल भारती ने कहा- कि सभी राज्यों की सरकारों को छत्तीसगढ़ सरकार की ही तरह आदिवासी कलाकारों की सुध लेनी चाहिए। कलाकारों को छत्तीसगढ़ सरकार मान-सम्मान दे रही है। दूसरे राज्यों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।

 

आदिवासी कलाकार संस्कृति का गौरव होते हैं। वे संस्कृति, विरासत, जंगल, पानी और धरोहरों को बचाने का काम करते हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार को मैं धन्यवाद देना चाहेंगे कि उन्होंने इतनी सुंदर पहल की है। छत्तीसगढ़ के लोग जब भी हमारे प्रदेश में आएंगे तो यही मान-सम्मान उन्हें हम भी देंगे।

 

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