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सिक्किम से आए लोक कलाकारों ने तमांग सेलो नृत्य की प्रस्तुति से मोहा लोगों का मन, इसके वाद्य यंत्रों को भगवान बुद्ध का माना जाता है प्रतीक | ऑनलाइन बुलेटिन

रायपुर | [धर्मेंद्र गायकवाड़] | तमांग भारत के सिक्किम राज्य और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में रहने वाली एक मुख्य जनजाति है। यह जनजाति इन दोनों क्षेत्रों के नेपाली समाज का एक बहुत महत्वपूर्ण अन्य अंग है। जिन्होंने नेपाली प्रस्तुतिकारी कलाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया हुआ है।

 

तमांग गीतों को तमान भाषा में हवाई कहा जाता है। ट्राइबल फेस्ट 2022 में सिक्किम से आए तमांग दल द्वारा अपने पारंपरिक वेशभूषा में एक अत्यधिक लोकप्रिय नृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसे बोलचाल में डम्पू नाच बहु कहा जाता है। डम्पू वस्तुतः एक वाद्य यंत्र है जिसका इस नृत्य के अवसर पर उपयोग किया जाता है।

 

तमांग सेलो नृत्य सामान्य रूप से तमांग सेलो के नाम से जाना जाता है जिसमें ऊर्जा और शक्ति के प्रदर्शन की भरमार रहती है। यह समूचे सिक्किम राज्य में एक बहुत ही लोकप्रिय नृत्य है जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही भाग लेते हैं। इसे लो चा अर्थात नव वर्ष /न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के दौरान किया जाता है।

 

इस नृत्य में डम्पू के अतिरिक्त उपयोग में लाए जाने वाले वाद्य यंत्रों में मादल और तुंगना भी सम्मिलित हैं। इसमें उपयोग की जाने वाली 32 श्रेणी के वाद्य यंत्रों को भगवान बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।

 

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