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छत्तीसगढ़ का करमा नृत्य, आदिवासी महिलायें गहरी नीली साड़ी पहने और सिर पर कलगी लगाए सामूहिक एकता का संदेश देते हुए आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

रायपुर | [धर्मेंद्र गायकवाड़] | राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्स : छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलायें गहरी नीली साड़ी पहने और सिर में कलगी लगाए आदिवासी परम्परा की पहचान को सरंक्षित रखते हुए नृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य सामूहिक, सामजंस्य और एकता का संदेश देता है जैसे हजार घुंघरूओं में एक घुंघरू की ताल। ठीक वैसा ही अनेकता में एकता का संदेश देता छत्तीसगढ़ का पारंपरिक आदिवासी नृत्य करमा। कलाकारों ने निशान बाजा, मोहरी, मांदर, टिमटिमि बाजा का प्रयोग करते हुए कर्णप्रिय संगीत के साथ सुंदर करमा नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।

करमा नृत्य ने देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। यह नृत्य शारीरिक व्यायाम के साथ ही साथ लोगों का मानसिक स्वास्थ्य भी मजबूत करता है और उन्हें एकता के सूत्र में बांधने, सामंजस्य बनाने और सबका साथ सबका विकास की प्रेरणा देता है।

 

मेजबान छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा मंच पर नृत्य की प्रस्तुति के साथ ही दर्शक दीर्घा में मौजूद लोग झूमने लगे। इस दौरान वाद्य यंत्रों में भी छत्तीसगढ़ की झलक दिखी। निशान बाजा, मोहरी, मांदर, टिमटिमि बाजा का प्रयोग करते हुए कर्णप्रिय संगीत के साथ सुंदर  प्रस्तुति दी।

दिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आज तीसरा व अंतिम दिन है। www.onlinebulletin.in अपने पाठकों के लिए नृत्य के कुछ अंश प्रस्तुत करेगा। कोशिश रहेगी कि हमारी टीम नृत्य की झलकियां आप तक हू-ब-हू पहुंचा सकें। हमसे जुड़ने के लिए आप फेसबुक पर online bulletin dot in सर्च करें और ट्विटर यूजर्स @onlinebulletin1 सर्च कर लाइक व फॉलों करें।

मेरी जान तिरंगा है meree jaan tiranga hai
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