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पुजारी को बंधक बना छीनी मंदिर की चाबी और बेशकीमती गरुण प्रतिमा ले भागे चोर pujaaree ko bandhak bana chheenee mandir kee chaabee aur beshakeematee garun pratima le bhaage chor

बिलासपुर | [छत्तीसगढ़ बुलेटिन] | जिले के मस्तूरी क्षेत्र के पाली ग्राम में भांवर गणेश मंदिर से गुरूवार की देर रात काले ग्रेनाइड पत्थर की बनी गरुण प्रतिमा की चोरी हो गई। 4 अज्ञात चोरों ने पहले मंदिर के पुजारी महेश राम केवट को बंधक बनाया और बाद में गरुण प्रतिमा को उखाड़कर ले गए। जिला पुलिस नाकेबंदी कर चोरी गई बेशकीमती प्रतिमा और आरोपियों की तलाश कर रही है।

मस्तूरी थाना प्रभारी प्रकाश कान्त ने बताया कि मस्तूरी क्षेत्र के पाली ग्राम में स्थित भांवर गणेश मंदिर में गुरूवार की रात करीब 1 से 2 बजे के बीच चार अज्ञात व्यक्ति मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर परिसर में निवासरत पुजारी महेश राम केवट के हाथ-पैर बांधकर उसे बंधक बनाया और मंदिर की चाबी छीन ली। चारों लोग मंदिर का दरवाजा खोलकर ब्लैक ग्रेनाइड से बनी करीब ढाई फुट की गरुण प्रतिमा को लेकर भाग खड़े हुए।

 

थाना प्रभारी के अनुसार भांवर गणेश मंदिर के गर्भगृह में बेशकीमती गरुण प्रतिमा अपने आसन में जड़ी हुई थी, चोर उसे जमीन से उखाड़कर ले गए। उन्होंने बताया कि पुजारी महेश राम केवट ने सुबह तक किसी तरह खुद को को बंधनमुक्त किया और गांववालों को इसकी खबर दी। देखते-देखते पूरे गाँव में यह खबर आग की तरह फ़ैल गई। सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप- महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल देव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सीएसपी चकरभाठा गरिमा द्विवेदी, मस्तूरी थाना का स्टाफ, एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की टीम, डॉग स्कॉड, फिंगरप्रिट एक्सपर्ट की टीम भी मौके पर पहुंच कर आगे की कार्यवाही कर रही है।

 

पुलिस के अनुसार प्राचीन गरूण प्रतिमा की चोरी होने के मामले में जिले के सभी आने-जाने वाले रास्तों पर नाकाबंदी कर चुराई गई मूर्ति और आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस की अलग-अलग टीम आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों से पूछताछ भी कर रही है।

 

1991 में डिडनेश्वरी की प्रतिमा हुई थी चोरी

 

वृहद् मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र के पुरातात्विक महत्त्व के स्थल मल्हार के डिडनेश्वरी मंदिर से काले ग्रेनाइड प्रस्तर से निर्मित डिडनेश्वरी देवी (डिडिन दाई) की प्रतिमा 31 साल पहले, 19 अप्रैल 1991 में चोरी हुई थी। गणेश मंदिर से गरुण प्रतिमा की चोरी और मल्हार से डिडनेश्वरी देवी की प्रतिमा की चोरी का तरीका एक जैसा है। दोनों प्रतिमाएं काले ग्रेनाइड पत्थर की बनी हुई हैं। दोनों मूर्तियों का चोरी का समय रात्रि एक से दो के बीच है।

 

डिडनेश्वरी देवी की प्रतिमा की चोरी से पहले चोरों ने मंदिर में सोये हुए पुजारी से देवी के दर्शन के बहाने मंदिर खुलवाया था। मंदिर में घटना की रात्रि में पुजारी तथा उसके दामाद सोये हुये थे। चोरों की संख्या लगभग 6 थी। इन्होंने पुजारी को बहाने से बाहर बुलाकर कुछ दूरी पर बलपूर्वक उसे उसी की धोती से कसकर बांध दिया था। मंदिर में स्थित पुजारी के दामाद को पिस्तौल अड़ाकर चाबी मांगी और मूर्ति को उठाकर सफेद रंग की मारुति वैन में भरकर ले गये।

 

चोरों ने पुजारी के दामाद को मंदिर के भीतर बंद कर ताला लगाकर चाबी कहीं अन्यत्र फेंक दी। बाद में किसी प्रकार से पुजारी अपने बंधन खोलकर दौड़ते हुये मंदिर तक आया और बदहवास हालत में उसने चोरी की घटना की जानकारी ग्रामवासियों को दी थी।

 

उस वक्त डिडिन दाई की प्रतिमा का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाज़ार मूल्य 14 करोड़ रूपये आंका गया था। मूर्ति चोर उत्तर प्रदेश के मैनपुर इलाके से मल्हार आये थे। उन्होंने नेपाल के तस्करों से इस मूर्ति का सौदा साढ़े चौदह करोड़ रूपयों में कर लिया था। इसके पहले कि डिडिन दाई की मूर्ति विदेश भेजी जाती बिलासपुर पुलिस ने उत्तरप्रदेश पुलिस के सहयोग से घटना के एक माह बाद 21 मई 1991 को मैनपुर से इसे बरामद कर लिया।

 

दरअसल पुलिस को स्थानीय टोल बैरियर से एक सुराग हाथ लगा था जहाँ गाड़ी के नंबर के साथ रसीद काटी गई थी। पुलिस को तहकीकात से पता चला कि यह स्थानीय ट्रेवल्स एजेंसी की गाड़ी है। स्थानीय पुलिस चालाकी से एक गाड़ी किराये से लेने के लिए उक्त ट्रेवल्स एजेंसी में पहुंची। वहीँ से पुलिस को आपसी बातचीत से पता चला कि किन-किन लोगों ने एक माह के दौरान गाड़ी किराये से ली थी। पर्याप्त सुराग इकट्ठे कर पुलिस उसके आधार पर उत्तरप्रदेश तक पहुँच गई।

 

अंततः यूपी-एमपी पुलिस के संयुक्त प्रयासों से मूर्तिचोर धर लिए गए और उनके पास से डिडिन दाई की प्रतिमा भी सुरक्षित बरामद कर ली गई। पुलिस मात्र 2 आरोपियों को ही गिरफ्तार कर सकी जबकि 3 अन्य आरोपी भाग जाने में सफल रहे। मूर्ति चोरों ने बताया था कि मूर्ति बिलासपुर से मंडला, जबलपुर, सागर, ललितपुर, झांसी होते हुए मैनपुर पहुंचाई गई थी।

 

आश्चर्यजनक रूप से मूर्तिचोरों का सरगना कभी भी पकड़ा नहीं जा सका। असल में, उस वक्त के जैसे हालात थे उसके हिसाब से पुलिस की प्राथमिकता मूर्ति को सुरक्षित वापस लाना ही था।

 

पुरातत्वविद राहुल सिंह ने बताया कि डिडिन दाई की मूर्ति पहले बिलासपुर लायी गई। बिलासपुर में इसका सिविल लाइन थाना परिसर में बाकायदा पंडाल बनाकर सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। उस वक्त दिनभर प्रतिमा के दर्शन और पूजा करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था। सिविललाइन पुलिस दोहरा काम कर रही थी। मूर्ति का संरक्षण, वहां की व्यवस्था के साथ-साथ पुलिसकर्मी पुजारी का कर्तव्य भी निर्वहन कर रहे थे। बाद में न्यायालयीन आदेश से यह प्रतिमा पूर्वधारक लैनूराम कैवर्त को एक लाख रूपये की जमानत पर सौप दी गई। प्रतिमा को एक विशाल शोभा यात्रा के साथ मल्हार ले जाया गया।

 

इस यात्रा में 33 किलोमीटर का सफ़र पूरा करने में 8 घंटे से भी जयादा का वक्त लगा। बाद में डिडनेश्वरी देवी की प्रतिमा को शुभ महूर्त में 7 जून 1991 को उसके मूल स्थान में पुनर्प्रतिष्ठित कर दिया गया।

 

 

 

 

The thieves ran away with the temple key and the prized idol of the idol taken away by taking the priest hostage

 

Bilaspur | [Chhattisgarh Bulletin] | A Garun idol made of black grenide stone was stolen from Bhanwar Ganesh temple in Pali village of Masturi area of ​​the district late on Thursday night. 4 unknown thieves first took the priest of the temple Mahesh Ram Kewat hostage and later took away the idol of Garun. The district police is searching for the prized statue stolen by the blockade and the accused.

Masturi police station in-charge Prakash Kant told that four unidentified persons reached the temple in Bhanwar Ganesh temple located in Pali village of Masturi area between 1 to 2 pm on Thursday night. They tied the hands and feet of the priest Mahesh Ram Kewat residing in the temple premises and took him hostage and snatched the keys of the temple. The four people opened the door of the temple and ran away with the idol of about two and a half feet made of black grenide.

 

According to the police station in-charge, in the sanctum sanctorum of Bhanwar Ganesh temple, the prized idol of Garun was embedded in its seat, the thieves took it away from the ground. He told that the priest Mahesh Ram Kewat somehow freed himself till morning and informed the villagers about it. Soon this news spread like fire in the whole village. Hundreds of devotees gathered in the temple premises. On getting the information, the police also reached the spot.

 

In view of the seriousness of the matter, Deputy Inspector General and Senior Superintendent of Police Parul Mathur, Additional Superintendent of Police Rahul Dev Sharma, Additional Superintendent of Police and CSP Chakarbhatha Garima Dwivedi, Staff of Masturi Police Station, Anti Crime and Cyber ​​Unit (ACCU) team, Dog Squad The team of fingerprint expert is also reaching the spot and taking further action.

 

According to the police, in the case of theft of the ancient Garun statue, the search is on for the stolen idol and the accused by blocking all the entry and exit routes of the district. Different teams of police are also interrogating the villagers in the surrounding areas.

 

 Didneshwari’s statue was stolen in 1991

 

The idol of Didneshwari Devi (Didin Dai) made of black grenide stone from the Didneshwari temple of Malhar, a site of archaeological importance in the Masturi police station area of ​​Bilaspur district of Chhattisgarh in greater Madhya Pradesh, was stolen 31 years ago, on 19 April 1991. The method of stealing the idol of Garuna from Ganesh temple and the idol of Didneshwari Devi from Malhar is the same. Both the statues are made of black grenide stone. The stealing time of both the idols is between one and two in the night.

 

Before the theft of the idol of Didneshwari Devi, the thieves had opened the temple on the pretext of seeing the goddess from the priest sleeping in the temple. The priest and his son-in-law were sleeping in the temple on the night of the incident. The number of thieves was about 6. He called the priest out on the pretext and had tied him tightly to his dhoti by force at some distance. The son-in-law of the priest located in the temple asked for the key with a pistol and took the idol and took it away in a white colored Maruti van.

 

The thieves locked the priest’s son-in-law inside the temple and threw the key somewhere else. Later, somehow the priest came running to the temple, untied his shackles and in a delirious condition, he informed the villagers about the incident of theft.

 

At that time the international market value of Didin Dai’s statue was estimated at Rs 14 crore. The idol thieves had come to Malhar from Mainpur area of ​​Uttar Pradesh. He had made a deal of this idol with the smugglers of Nepal for fourteen and a half crore rupees. Before the idol of Didin Dai was sent abroad, the Bilaspur Police with the help of Uttar Pradesh Police recovered it from Mainpur on 21 May 1991, a month after the incident.

 

In fact, the police got a clue from the local toll barrier where the receipt along with the number of the vehicle was deducted. The police came to know from the investigation that it was the vehicle of the local travel agency. The local police smartly reached the said travel agency to hire a vehicle. From there, the police came to know from mutual conversation that some people had taken the vehicle on rent during a month. After collecting enough clues, the police reached Uttar Pradesh on its basis.

 

Eventually, with the joint efforts of the UP-MP Police, the sculptors were nabbed and Didin Dai’s statue was also safely recovered from them. Police could arrest only 2 accused while 3 other accused managed to escape. Idol thieves had told that the idol was taken from Bilaspur to Mainpur via Mandla, Jabalpur, Sagar, Lalitpur, Jhansi.

 

Surprisingly, the kingpin of the idols was never caught. In fact, according to the situation at that time, the priority of the police was to bring the idol back safely.

 

Archaeologist Rahul Singh told that the idol of Didin Dai was first brought to Bilaspur. In Bilaspur, its public demonstration was done by making a pandal in the Civil Line police station premises. At that time, there was an influx of devotees who visited and worshiped the idol throughout the day. Civil line police was doing double duty. Along with the protection of the idol, the arrangements there, the policemen were also discharging the duty of the priest. Later, by a court order, this statue was handed over to the former holder Lanuram Kaivart on a bail of one lakh rupees. The statue was taken to Malhar with a huge procession.

 

The journey took more than 8 hours to complete the 33 km journey. Later the idol of Didneshwari Devi was re-established in its original place on 7th June 1991 in auspicious time.

 

 

 

©बिलासपुर से अनिल बघेल की रपट

 

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