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सेम-सेक्स शादी को कानूनी मान्यता देने की मांग को लेकर समलैंगिक जोड़ा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, यहां जानें याचिका में क्या है खास | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | समलैंगिक जोड़े ने सुप्रीम कोर्ट से सेम-सेक्स शादियों को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कानूनी मान्यता देने की मांग की है। याचिका में एक कानूनी फ्रेमवर्क की अनुपस्थिति को उजागर किया गया है जो कि एलजीबीटीक्यू+ लोगों को अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने की इजाजत देता हो। सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की भी अपील की गई है।

 

याचिका के जरिए इस जोड़े ने अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने के LGBTQ+ लोगों के मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने एक-दूसरे से शादी करने के अपने मौलिक अधिकार पर जोर दिया है। उन्होंने अदालत से उन्हें ऐसा करने की अनुमति देने और इसे लेकर दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग रखी है।

 

याचिका में मौलिक अधिकार पर जोर

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है। दोनों ही याचिकाकर्ता LGBTQ+ समुदाय के सदस्य हैं। इनका कहना है कि अपनी पसंद के शख्स शादी करने का अधिकार भारत के संविधान से मिला हुआ है और यह LGBTQ+ समुदाय के लोगों पर भी लागू होना चाहिए।

 

यह याचिका याचिकाकर्ताओं की ओर से अपने मामले के साथ ही LGTBQ+ समुदाय के सभी सदस्यों को लेकर दायर की गई है। इसमें जोर देकर कहा गया है कि मौलिक अधिकार जेंडर या सेक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं।

 

याचिका के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट भी यह मान चुका है कि LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों के पास अन्य नागरिकों के समान ही मानवीय, मौलिक और संवैधानिक अधिकार हैं। हालांकि, विवाह की संस्था को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा फिलहाल LGBTQ+ लोगों को उनकी पसंद से शादी की अनुमति नहीं देता है। इससे संविधान से मिले मौलिक अधिकारों का यह उल्लंघन होता है।

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