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यौन शोषण रोकने का स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करे सीबीएसई : हाईकोर्ट yaun shoshan rokane ka skoolee paathyakram taiyaar kare seebeeesee : haeekort

कोच्चि (केरल)।| [कोर्ट बुलेटिन] | केरल उच्च न्यायालय ने स्कूली बच्चों के यौन शोषण के बढ़ते मामलों पर दुख जताते हुए शुक्रवार को राज्य सरकार तथा सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) को पाठ्यक्रम के तौर पर यौन शोषण के रोकथाम पर केंद्रित एक कार्यक्रम शामिल करने का निर्देश दिया है।

 

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने 15 साल की लड़की के यौन शोषण के मामले में आरोपी याचिकाकर्ता को नियमित जमानत दिए जाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। इस मामले में पीड़िता गर्भवती हो गयी थी।

 

अदालत ने अपने आदेश में ‘एरिन्स लॉ’ नामक एक कानून का जिक्र किया, जिसका नाम अमेरिका में बाल यौन शोषण की पीड़िता के नाम पर रखा गया है। अदालत ने अपने आदेश में सभी स्कूलों को बाल यौन शोषण की रोकथाम पर केंद्रित एक कार्यक्रम लागू करने का निर्देश दिया।

 

उच्च न्यायालय ने कहा कि केरल और सीबीएसई आयु के अनुरूप रोकथाम केंद्रित कार्यक्रम शुरू करने के लिए एक पद्धति की पहचान करने के वास्ते विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेंगे। विशेषज्ञों की समिति अपने गठन के 6 महीनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपेगी तथा केरल तथा सीबीएसई अकादमिक वर्ष 2023-24 से इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए उचित आदेश जारी करेगा।

 

अनुकूल नतीजे नहीं मिले

 

अदालत ने कहा कि यौन अपराधों पर जागरूकता पैदा करने की प्रक्रिया के अभी तक अनुकूल नतीजे नहीं प्राप्त हुए हैं। यहां तक कि कुछ स्कूलों में बताए जा रहे ”गुड टच” और ”बैड टच” जैसे शब्द भी बहुत अस्पष्ट हैं।

 

इन व्यापक शब्दों को न केवल यौन शोषण के मामलों की पहचान करने बल्कि झूठे या गलत आरोपों से बचने के लिए बेहतर तरीके से वर्गीकृत करने की आवश्यकता है जैसे कि ‘सेफ टच’ (सुरक्षित स्पर्श), ‘अनसेफ टच’ (असुरक्षित स्पर्श), ‘अनवांटेड टच’ (अवांछित स्पर्श) आदि। इसपर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

 

 

CBSE should prepare school curriculum to prevent sexual abuse: High Court

 

Kochi (Kerala).| [Court Bulletin] | Expressing grief over rising cases of sexual abuse of school children, the Kerala High Court on Friday directed the state government and CBSE (Central Board of Secondary Education) to include a program focused on prevention of sexual abuse as a curriculum.

 

Justice Bechu Kurian Thomas issued these directions while hearing a plea seeking regular bail to the accused petitioner in the sexual abuse case of a 15-year-old girl. In this case the victim had become pregnant.

 

In its order, the court referred to a law called ‘Erins Law’, which is named after a victim of child sexual abuse in the US. The court in its order directed all schools to implement a program focused on prevention of child sexual abuse.

 

The High Court said that Kerala and CBSE will constitute a committee of experts to identify a methodology to introduce age-appropriate prevention centric programmes. The Committee of Experts will submit its recommendations within a period of 6 months of its formation and will issue appropriate orders for implementation of the program from Kerala and CBSE academic year 2023-24.

 

 did not get favorable results

 

The court observed that the process of creating awareness on sexual offenses has not yielded favorable results so far. Even the terms “good touch” and “bad touch” used in some schools are too vague.

 

These broad terms need to be better categorized not only to identify cases of sexual abuse but also to avoid false or false allegations such as ‘safe touch’, ‘unsafe touch’ (unsafe touch), ‘Unwanted touch’ etc. This should be considered seriously.

 

 

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