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सरकारी स्कूल की शिक्षा में गुणवत्ता में कमी के कारण और निदान sarakaaree skool kee shiksha mein gunavatta mein kamee ke kaaran aur nidaan

©संतोष यादव

परिचय- मुंगेली, छत्तीसगढ़.


 

 

वर्तमान समय में शिक्षा में गुणवत्ता एक बहुत ही विकराल समस्या बन गई है । यदि हम सरकारी स्कूल के शिक्षा में गुणवत्ता पर गहन विचार करेंगे तो हम पाएंगे कि, शासन, प्रशासन, शिक्षक, विद्यार्थी, पालक, समाज, समुदाय, संस्था, समिति, राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक, जैविक कारण या वातावरण, भौतिक संसाधन है। इसमें कोई एक कारण उत्तरदाई नहीं है बल्कि अनेकों कारण उत्तरदाई है।

 

शिक्षा की गुणवत्ता (स्तर) में गिरावट के प्रमुख कारण

 

  • 1) शासन एवम प्रशासन की नीतियां इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को पास करना या कक्षा उन्नति करना अनिवार्य होना, बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था को खत्म करना ।
  • 2) अधिकांशतः विद्यालयों में प्राचार्य, प्रधानपाठक, सहायक शिक्षकों शिक्षकों, विषय शिक्षकों, खेल शिक्षक, योग शिक्षक, संगीत शिक्षक, पीटी शिक्षक, चपरासी, क्लार्क, नियमित सफाई कर्मचारी की कमी।
  • 3) कई विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं जैसे भवन, बिजली, पानी, खेल का मैदान, पक्की सड़क, बाउंड्रीवॉल की कमी।
  • 4) छात्र शिक्षक अनुपात का पालन नहीं करना, विद्यार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि होना।
  • 5) अधिकांश पालकों एवम बच्चों का शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी ।
  • 6) शिक्षा विभाग की सैकड़ों योजनाएं और नित नए प्रयोग।
  • 7) अधिकारियों का शिक्षकों के प्रति असहयोगात्मक या तानाशाही रवैया।
  • 8) पालकों का शिक्षा और शिक्षकों के प्रति असहयोगात्मक रहना, अविश्वास, शिक्षकों का सम्मान न करना ।
  • 9) शिक्षकों को पर्याप्त वेतन भत्तों का न मिलना। और सही समय पर पदोन्नति, क्रमोन्नति प्राप्त नहीं होना ।
  • 10) आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों में शामिल नहीं करना।
  • 11) शिक्षकों को प्रशिक्षण नहीं मिलना ।
  • 12) विद्यार्थियों का लगातार अनुपस्थिति ।
  • 13) कुछ शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों का ठीक ढंग से पालन नहीं करना आदि।

 

इसके अलावा और अन्य कई कारण हैं।

 

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु उपाय –

 

  • 1) सरकार द्वारा बोर्ड परीक्षा को पुन: लागू किया जाना चाहिए। पांचवी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं कक्षाओं को बोर्ड द्वारा परीक्षा संचालित किया जाना अतिआवश्यक है।
  • 2) विद्यालय में प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, योग शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, संगीत शिक्षक, खेल शिक्षक, लिपिक, चपरासी, सफाई कर्मचारी, माली, चौकीदार एवम अन्य स्टाफ की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में किया जाना चाहिए।
  • 3) विद्यालय के मूलभूत सुविधाओं (भौतिक संसाधनों ) का विकास किया जाना चाहिए।
  • 4) शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण एवम उचित समय पर पदोन्नति, क्रमोन्नति, पर्याप्त वेतन भत्ते, पेंशन आदि की सुविधाएं देना।
  • 5) छात्र – शिक्षक अनुपात का पालन करना चाहिए।
  • 6) विद्यार्थियों और पालकों में जागरूकता लाना तथा शिक्षा के महत्व को समझाना।
  • 7) शिक्षकों को प्रति कानून के द्वारा पर्याप्त आदर, सम्मान की व्यवस्था किया जाना चाहिए और ऐसे कानून व्यवस्था बनाए जाय जिस प्रोटोकाल का पालन कर भारत देश के हर एक नागरिक शिक्षकों का आदर, सम्मान करें। जैसे – फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जापान आदि देशों में है।
  • 8) शिक्षा विभाग की अनावश्यक सैकड़ों योजनाओं को तुरंत बंद कर ऐसी वार्षिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिसमें शिक्षकों का मुख्य कार्य केवल शिक्षा देने में हो। अन्य कार्य या केवल सूचना या डाक देने में नहीं होनी चाहिए।
  • 9) शिक्षकों को चुनाव, जनगणना, और प्राकृतिक आपदा के अलावा अन्य किसी कार्य में नहीं लगाया जाना चाहिए।
  • 10) शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों में जन सूचना अधिकारी अलग से नियुक्त किया जाना चाहिए।
  • 11) आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालय में मर्ज कर देना चाहिए।
  • 12) सभी कक्षाओं का विद्यालय एक ही कैम्पस में प्राचार्य, प्रधान पाठक द्वारा संचालित किया जाना चाहिए।
  • 13) विषय, पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप निर्धारित किया जाना चाहिए। जैसे सीबीएसई बोर्ड के विषय एवम पाठयक्रम हैं।
  • 14) शिक्षकों के नियुक्ति के पश्चात एक वर्षीय या दो वर्षीय बीएड, डीएड, (डीएलएड, बीटीसी) का प्रशिक्षण शिक्षा विभाग के द्वारा प्रशिक्षण संस्थाओं के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था किया जाना आवश्यक है।
  • 15) शिक्षा विभाग एवम अन्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के द्वारा मॉनिटरिंग, निरीक्षण, प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों, बालकों, पालकों, विद्यालयों के प्रति सहयोगात्मक रूप में कार्य करें।
  • 16) शिक्षा विभाग के लिए पर्याप्त बजट व्यवस्था शासन के द्वारा किया जाना चाहिए।
  • 17) शिक्षा विभाग के प्रशासनिक पदों को शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्रधानपाठकों, प्राचार्यों को ही वरिष्ठता कार्य और अनुभव के आधार पर पदोन्नति दिया जाना चाहिए।
  • 18) गैर जिम्मेदार शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा समुचित जांच के पश्चात अनुशासनात्मक, एवम कठोर कार्यवाही किया जाना चाहिए।
  • 19) शिक्षकों और शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड व्यवस्था किया जाना चाहिए।
  • 20) लगातार अनुपस्थित विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों के द्वारा पालक संपर्क किया जाना चाहिए। साथ ही साथ बालकों के शिक्षा के प्रति उदासीन पालकों पर शासन के द्वारा कठोर कार्यवाही, दंड की व्यवस्था किया जाना चाहिए।
  • 21) शाला प्रबंध समिति को और अधिक सशक्त करना चाहिए।

 

संतोष यादव

Santosh Yadav


 

 

Causes and diagnosis of poor quality in government school education

 

 

At present, quality of education has become a very formidable problem. If we take a deep look at the quality of education in government school, we will find that, governance, administration, teacher, student, parent, society, community, institution, committee, political, religious, social, economic, cultural, psychological, biological reason or Environment is a physical resource. Not one reason is responsible for this, but many reasons are responsible.

 

 

Major reasons for the decline in the quality (level) of education

 

  • 1) The policies of the government and administration, it is mandatory for the students to pass or improve the class, to eliminate the system of board examination.
  • 2) Lack of principal, headmaster, assistant teachers teachers, subject teachers, sports teachers, yoga teachers, music teachers, PT teachers, peons, clerks, regular sweepers in most of the schools.
  • 3) Lack of basic facilities like building, electricity, water, playground, pucca road, boundary wall in many schools.
  • 4) Non-compliance of student teacher ratio, continuous increase in the number of students.
  • 5) Lack of awareness about education of most of the parents and children.
  • 6) Hundreds of schemes and new experiments of education department.
  • 7) Uncooperative or dictatorial attitude of the officials towards the teachers.
  • 8) Parents being uncooperative towards education and teachers, distrust, not respecting teachers.
  • 9) Non-receipt of adequate salary and allowances to the teachers. And not getting promotion, promotion at the right time.
  • 10) Non-inclusion of Anganwadi centers in primary schools.
  • 11) Teachers not getting training.
  • 12) Continuous absence of students.
  • 13) Some teachers, employees, officers not performing their duties properly etc.

 

Apart from this, there are many other reasons.

 

Measures to improve the quality of education

 

  • 1) The board exam should be reintroduced by the government. It is necessary to conduct examinations by the board for the fifth, eighth, tenth, twelfth classes.
  • 2) Principal, lecturer, teacher, assistant teacher, yoga teacher, exercise teacher, music teacher, sports teacher, clerk, peon, sweeper, gardener, watchman and other staff should be arranged in sufficient quantity in the school.
  • 3) The basic facilities (physical resources) of the school should be developed.
  • 4) To give proper training to teachers and facilities for promotion, promotion, adequate salary allowances, pension etc. at the right time.
  • 5) Student-teacher ratio should be followed.
  • 6) To create awareness among the students and parents and to explain the importance of education.
  • 7) Teachers should be provided with adequate respect, respect by law and such a law and order should be made, following which every citizen of India should respect and respect teachers. For example, in countries like France, Switzerland, Japan etc.
  • 8) Immediately stop hundreds of unnecessary schemes of the education department and prepare such an annual action plan, in which the main work of teachers is only in imparting education. Should not be engaged in any other work or merely in the delivery of information or mail.
  • 9) Teachers should not be engaged in any work other than election, census, and natural calamity.
  • 10) Public Information Officer should be appointed separately in the schools by the Education Department.
  • 11) Anganwadi centers should be merged with primary schools.
  • 12) School for all classes should be run by the Principal, Principal Pathak in the same campus.
  • 13) The subject, curriculum should be determined according to the level of the students. Like the subjects and syllabus of CBSE board.
  • 14) After the appointment of teachers, training of one-year or two-year B.Ed, D.Ed., (D.Ed., BTC) should be arranged by the Education Department for regular training through training institutions.
  • 15) Work cooperatively towards teachers, children, parents, schools during monitoring, inspection, training by the officers and employees of Education Department and other departments.
  • 16) Adequate budget arrangement for the education department should be done by the government.
  • 17) The administrative posts of the education department should be promoted to teachers, lecturers, head readers, principals only on the basis of seniority, work and experience.
  • 18) Disciplinary and strict action should be taken after proper investigation by the Education Department for irresponsible teachers, officers, employees.
  • 19) Dress code should be arranged for the teachers and all the officers, employees of the education department.
  • 20) Parents should be contacted by teachers for persistent absenteeism. At the same time, strict action, punishment should be arranged by the government on the parents who are indifferent to the education of the children.
  • 21) The school management committee should be strengthened more.

 

 

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