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करगिल जंग ! (१९९९) karagil jang ! (1999)

©रामकेश एम यादव

परिचय– मुंबई, महाराष्ट्र.


 

 

युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में,

बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे।

टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियाँ,

फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे।

 

एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं,

अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।

घायल-घाटी के चेहरे से व्यथित थे वो फौजी,

दुश्मन के कलेजे को फाड़ रहे थे रणबाँकुरे।

 

उनकी बर्बरता की सीढ़ी जला रहे थे गोली से,

उस सेना की रसद को काट रहे थे रणबाँकुरे।

हौसले बुलंद थे हमारी नभ, जल, थल, सेना के,

दुश्मन को धूल वो चटा रहे थे रणबाँकुरे।

 

दाल गल न पाई उस करगिल की समर में,

शेर के जैसे सभी दहाड़ रहे थे रणबाँकुरे।

इंच -इंच जमीन पर बहाये खून की नदी,

तिरंगे की आन को बचा रहे थे रणबाँकुरे।

 

धन्य हैं वो माँयें जिसने इनको पिलाया दूध,

लाशों की सीढ़ी पर चढ़ रहे थे रणबाँकुरे।

सूरज -चाँद जैसी अमर रहेगी कीर्ति इनकी,

उनके पाले साँपों को मार रहे थे रणबाँकुरे।

 

घर में घुसकर उत्तर देने मेरी फौज को आता है,

राह कुर्बानी की सजा रहे थे रणबाँकुरे।

नई नबेली दुल्हन की ताजी सेज छोड़कर,

दुश्मन को गोली से भून रहे थे रणबाँकुरे।

 

जिस्म की मौत तो कोई देखो होती ही नहीं,

सरफरोशी की तमन्ना दिखा रहे थे रणबाँकुरे।

धड़कन रुकने से अरमान नहीं मरा करते,

दुश्मन के खून से तब नहा रहे थे रणबाँकुरे।

 

सिंहों की ख़ामोशी को कायरता का नाम न दे,

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चुन-चुनकर तब बदला ले रहे थे रणबाँकुरे।

भारत की उदारता का फायदा न उठाना पाक,

त्याग, तप, तेज को दिखा रहे थे रणबाँकुरे।

 

 

 

 

रामकेश एम यादव

Ramkesh M Yadav

 

In that color of war, in battle with the enemy,
Our Ranbankures were showing bravery.
Whether it is Tiger Hill or the hills of Dras,
Ranbankure was getting him again.

 

He is sitting wearing the jewel of the atom-bomb,
Ranbankure was giving the answer of downfall.
Those soldiers were distressed by the face of the injured-valley.
Ranbankure was tearing the heart of the enemy.

 

They were burning the ladder of barbarism with bullets,
Ranbankure was cutting the logistics of that army.
Our spirits were high, of our water, land, army,
He was licking the enemy’s dust.

 

Dal could not melt in the summer of Kargil,
Everyone was roaring like a lion.
River of blood shed every inch on the ground,
Ranbankure was saving the flag of the tricolor.

 

Blessed are the mothers who gave them milk,
Ranbankure was climbing the ladder of corpses.
Their fame will remain immortal like the sun and the moon.
Ranbankure was killing snakes on his feet.

 

Entering the house comes my army to answer,
Ranbankure was being punished for sacrifice.
Leaving the fresh set of new Nabeli bride,
Ranbankure was roasting the enemy with bullets.

 

No one can see the death of the body,
Ranbankure was showing the desire of Sarfaroshi.
Armaan doesn’t die by stopping the beat,
Ranbankure was bathing in the blood of the enemy then.

अपने कौन, बेगाने कौन apane kaun, begaane kaun
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Do not give the name of cowardice to the silence of lions,
Ranbankure was taking revenge selectively then.
Pak not taking advantage of India’s generosity
Ranbankure was showing renunciation, tenacity and brilliance.

 

 

ज़ुनून zunoon

 

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