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लक्ष्मण रेखा lakshman rekha

©पद्म मुख पंडा

परिचय– रायगढ़, छत्तीसगढ़


 

खींच डाली है, खुद ही के लिए,

एक लक्ष्मण रेखा,

जब सांसारिक मोह और स्वार्थ को,

निकट से देखा!

मित्रों भाईयों बहनों और परिजनों को,

करता हूं प्रेम अपार,

इनके बिना , निस्संदेह,

जीना है दुश्वार।

परस्पर सहयोग और समर्थन से,

जीवन्त है व्यवहार,

इनके हित, मेरे हितों के साथ,

जुड़े हैं नेक विचार।

किन्तु, यह भी सच है,

अलग अलग गुणों से युक्त हो,

हम, सब हैं लाचार,

सबकी अलग अलग शैली है,

अलग अलग संसार!

हस्तक्षेप न हो , निजी मामलों में,

करते हैं प्रतिकार!

अपनी अपनी खिचड़ी पकाते,

जब सबको, मैंने देखा,

अपने जीवन में , खींच ली मैंने,

एक अमिट स्याही से, लक्ष्मण रेखा!

 

पद्म मुख पंडा

Padma Mukh Panda

 

 

Lakshman Rekha

 

 

 

Has pulled, for himself,
a red line,
When worldly attachment and selfishness,
Look closely!
To friends brothers sisters and family,
I love immense,
Without these, of course,
Living is difficult.
With mutual cooperation and support,
live behavior,
with their interests, my interests,
Good thoughts are connected.
But it is also true,
having different qualities,

We are all helpless
everyone has a different style,
different worlds!
Do not interfere, in private matters,
Let’s resist!
Cook your own khichdi,
When everyone, I saw,
In my life, I have pulled,
With an indelible ink, Lakshman Rekha!

 

 

धनक dhanak

धनक dhanak

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