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मुझको मालूम नहीं mujhako maaloom nahin

©गुरुदीन वर्मा, आज़ाद

परिचय– बारां, राजस्थान.


 

मुझको मालूम नहीं, मेरा परिवार कैसा है।

खबर पूरी है लेकिन, तेरा संसार कैसा है।।

मुझको मालूम नहीं—————–।।

 

वक़्त मिलता है कभी तो, उनको याद कर लेता हूँ।

क्या देखूँ और किसी को, तेरा चेहरा ही ऐसा है।।

मुझको मालूम नहीं ———————।।

 

कभी होता हूँ परेशान, उनका दर्द मैं सुनकर।

बहाता हूँ बहुत आँसू, तेरा यह प्यार कैसा है।।

मुझको मालूम नहीं—————–।।

 

देते हो तुम यह लानत, शहर क्यों छोड़ता नहीं हूँ।

मुझको अब होश कहाँ है, तेरा नशा ही ऐसा है।।

मुझको मालूम नहीं—————–।।

 

उठाता हूँ कभी कदम, करने को उनसे मुलाकात।

पहुंच जाता हूँ तेरे घर, तेरा रास्ता ही ऐसा है।।

मुझको मालूम नहीं—————–।।

 

कभी फिर आता है गुस्सा, एक बकवास है तू तो।

गुलाम है तेरा जी आज़ाद, तेरा जादू ही ऐसा है।।

मुझको मालूम नहीं——————।।

 

 

 

 

 

गुरुदीन वर्मा

Gurudina Verma, Azad

 

 

i don’t know

 

 

I don’t know how my family is.
The news is complete but how is your world.
I don’t know—————–

Whenever I get time, I remember them.
What to see and anyone, your face is like this.
I don’t know ———————.

Sometimes I get upset, I hear their pain.
I shed many tears, how is this love of yours.
I don’t know—————–

 

You give this damn, why don’t I leave the city.
Where is my senses now, your intoxication is such.
I don’t know—————–

Sometimes I take steps, to meet him.
I reach your home, your way is like this.
I don’t know—————–

सिर्फ एक वह भूल जो करती है खबरदार sirph ek vah bhool jo karatee hai khabaradaar
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Sometimes anger comes again, you are a bullshit.
Your soul is free, your magic is like this.
I don’t know——————

 

 

 

बचपन का खेल – काँचा bachapan ka khel Kaancha

 

 

 

 

 

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