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बचपन का खेल – काँचा bachapan ka khel Kaancha

©नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

परिचय– मुंबई, आईटी टीम लीडर


 

बचपन में खेला बहुत सारा खेल।

काँच की गोली ने सिखाया मेल।

 

एक – दूजे से मिलकर रहते ,

काँच की गोली से निशाना साधते।

 

टन से होती जब उसकी आवाज़।

सारे बच्चे उछलते, देते एक ही साज़।

 

मिट्टी को गूँथ कर पानी में बनाते गोली,

कभी काँच तो कभी मिट्टी से भरते झोली।

 

एक गोली से खेलकर कभी जीत जाते,

कभी झोली भर गोली भी पल में हार जाते।

 

धूल झाड़ कर फिर सब गले मिल जाते,

बचपन के खेल संग, यादों को दोहराते।

 

नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

Nilofar Farooqui Tauseef

 

 

Childhood Game – Kancha

 

 

Played a lot of games in childhood.
Glass bullet taught mail.

live together with each other,
Hitting with a glass bullet.

Tons when his voice.
All the children jumped and gave the same instrument.

Kneading clay and making tablets in water,
Sometimes the bags were filled with glass and sometimes with soil.

Sometimes you win by playing with one bullet.
Sometimes even a single bullet would be lost in a moment.

After sweeping the dust, everyone would embrace,
With the games of childhood, you repeat your memories.

 

 

अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की शिक्षा और सोच पर डाल रही हानिकारक प्रभाव atyadhik onalain geming bachchon kee shiksha aur soch par daal rahee haanikaarak prabhaav

 

 

 

 

मारो गोपाला Maro Gopala
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