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शाम सुहानी… shaam suhaanee

©डीआर महतो “मनु” 

परिचय- रांची, झारखंड


 

 

 

जग लुभाती रिम-झिम बरसती सावन है।

 

ये मौसम, ये बहारें कौतूहल बने हरदिल के नयन नशीले हैं,

बादलों की चालबाजी, छिपते-छिपाते ये रवि

की मस्तियाँ हैं।

 

झूमकर आई मतवाली सावन अब उसे भी इंद्रधनुषी बन जाना है,

अलौकिक रजनी, चांद क्यों बेताब है अब उसे भी उदय होना है।

 

शाम तु थम सा जाना क्षितिज की स्वर्णिम लुभा रही हैं,

ग्रह नक्षत्रों की मस्त मंडली नभ में अटखेलियां खा रही हैं।

 

अस्त हो रहा सूरज, खग् मृगों की मधुर स्वर जग ब्याप्त है,

रजनी चांदनी से आबाद है, ये वक्त बड़े नसीब से आई है।

 

ये मस्त बहारें, हरियाली नजारें ये नयनों को मस्त लुभा रही हैं,

चांद की चांदनी प्रखर ना हो जाए, गोरी तु क्यों शरमा रही है।

 

हम तुम अकेले गुलाबी बागों में चांदनी का पहरा अति सुहावना है,

चलो चलें चंद्रलोक इस जग में हम दोनों कातिलों के नजरों में हैं।

 

जग लुभाती रिम-झिम बरसती सावन है।

 

डीआर महतो

©DR Mahto Manu, Ranchi


 

The world is tempting Rim-Jhim Barsti Sawan.

These seasons, these springs are intoxicating in the eyes of every heart,
The trickery of the clouds, this sun hide and seek
Has fun.

Savan, which came with a jhumkar, now she too has to become rainbow,
Supernatural Rajini, why is the moon desperate, now he too has to rise.

Evening tu tham sa jana is the golden allure of the horizon,
The great circle of planetary constellations is eating rhetoric in the sky.

The setting sun, the melodious voice of the deer is pervading the world,
Rajni is inhabited by Chandni, this time has come with great luck.

These cool springs, the greenery views, they are alluring the eyes,
The moonlight of the moon should not become bright, why are you blushing fair?

We alone in the pink gardens, the guard of moonlight is very beautiful,
Let’s go to the moon, in this world we are both in the eyes of the slayer.

The world is tempting Rim-Jhim Barsti Sawan.

 

 

आधुनिक युग में संस्कृत aadhunik yug mein sanskrt

 

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