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शहर से दूर shahar se door

©नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

परिचय- मुंबई, आईटी टीम लीडर


 

शहर से दूर कहीं एक छोटा सा आशियाँ।

ज़मीन पे पाँव,आकाश पे मुस्काता चन्द्रमा।

मुहब्बत की दुनिया बेज़ुबान संग बसाई,

गोद में प्यार से उठाए, दर्द बताई।

 

न कोई प्लेटफॉर्म न कोई नया रास्ता,

तन्हा अकेले खड़े, हल्की रौशनी संग वास्ता।

घड़ी की सुई टिक-टिक कर क़दम बढाती,

चलना ही है ज़िन्दगी यही बात दोहराती।

 

रेल की पटरी करती रही इंतज़ार,

छुक-छुक की आवाज़ ले जाएगी उसपार।

टूटता तारा सिर्फ़ एक झलक दिखा पाया,

टूटकर ही सम्भलना है ये सीखा पाया।

 

अंधेरे में चाँद रौशनी बिखेर कर मुस्काया,

अंधेरे से डरना नहीं, उम्मीद पे क़दम बढ़ाया।

सफ़र है ज़िन्दगी यूँ ही गुज़रती जाएगी,

स्थान देख कर सिर्फ़ ठहरती जाएगी।

 

बेज़ुबान का दर्द समझा तो ज़िन्दगी आसान,

दूजे को अपना समझे वही होता है यहाँ महान।

एक नन्हा सा बच्चन जाने कितना सीखा गया,

एक तस्वीर थी ज़िन्दगी का मुजसमा बता गया।

 

 

नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

Nilofar Farooqui Tauseef


 

 

away from the city

 

A small mansion somewhere away from the city.
Feet on the ground, the moon smiling on the sky.
The world of love was built with the voiceless,
Carrying lovingly in the lap, told the pain.

No platform, no new way,
Standing alone, with little light.
The hand of the clock keeps ticking step by step,
Life has to go on repeating the same thing.

Waiting for the railway track,
The sound of chhuk chhuk will take him across.
The falling star could only show a glimpse,
I have learned that I have to take care of myself by breaking down.

 

In the dark, the moon smiled by spreading light,
Don’t be afraid of the dark, step on hope.
Journey is life will pass like this,
Will just stop seeing the place.

Life is easy if you understand the pain of the voiceless
Considering the other as your own, that is what is great here.
How much did a little Bachchan know,
There was a picture that told the story of life.

 

 

कुछ कहना है… kuchh kahana hai…

 

 

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