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कुछ कहना है… kuchh kahana hai…

©उषा श्रीवास, वत्स 

परिचय- बिलासपुर, छत्तीसगढ़.


 

बैठी थी आराम से,
विचार चल रहे थे,
आने वाले गणेशोत्सव के।
क्या करना है?
कैसे करना है?
सोच रही थी…!!

इतने में घर के मंदिर से,
किसी ने झांका।
मैंने पूछा, कौन है ?
तो आवाज़ आयी,
अरे! मैं गणपती।
कुछ कहना है, सुनेगी ?
हाँ, बताइये प्रभु,
सब करूँगी…!!

गणेश जी बोले —
आ रहा हूँ तेरे पास,
आनंद के लिए।
कोई दिखावा मत करना,
नहीं चाहिए सोने की दूर्वा।
नहीं चाहिए सोने के फूल,
न ही कोई जगमगाहट।
तकलीफ होती है मुझे,
मेरी सात्विकता, सादापन,
सब निकल जाता है…!!

तेरे बाग की मिट्टी ले,
दे मुझे आकार।
मैं तो हूँ गोल-मटोल,
कोई समस्या नही होगी।
फिर दे मुझे,
बैठने के लिए पाटा…!!

आंगन में उगी घास से,
ला दूर्वा और दो चार फूल।
हर दिन घर में बने,
भोजन का भोग लगा।
तो तेरा और मेरा,
आरोग्य ठीक रहेगा…!!

रोज़ सुबह तेरी,
ओंकार ध्वनि से उठाना,
रोज़ शाम,
मंत्र और शंखनाद करना।
उससे तेरे मन और घर में,
पवित्रता आएगी…!!

मेरा विसर्जन भी,
तेरे ही घर मे करना।
मैं पिघल कर,
माटी रूप ले लूं।
तो घर की बगिया में,
मुझे फैला देना।
मैं वहीं रहूंगा,
तेरे घर का ध्यान रखूंगा।
तू किसी तकलीफ में हुआ,
तो पल में आ सकूँगा…!!

 

 

उषा श्रीवास, वत्स

© Usha Srivas, Vats


 

have something to say…

 

 

was sitting comfortably
Thoughts were on
Coming Ganeshotsav.
What is the plan?
How to do?
I was thinking…!!

So from the temple of the house,
Somebody looked.
I asked, who is it?
Then the voice came
Hey! I am Ganpati.
Have something to say, will you hear?
Yes, tell me Lord
I will do everything…!!

पिता | Newsforum
READ

Ganesh ji said –
I’m coming to you
to enjoy.
don’t pretend
You don’t need a golden door.
Don’t want gold flowers,
Nor any twinkle.
hurts me,
My sincerity, simplicity,
Everything is gone…!!

Take the soil of your garden
give me shape
I’m chubby
There won’t be any problem.
then give me
Pata to sit…!!

from the grass in the courtyard,
La Durva and Two Four Flowers.
home made every day,
Enjoyed the food.
So yours and mine
Health will be fine…!!

Every morning your
to lift with the sound of Omkar,
everyday evening,
Chanting and chanting.
With him in your mind and home,
Purity will come…!!

my immersion,
Do it in your own house.
I melt
Let me take the form.
So in the garden of the house,
Spread me
I’ll be there
I will take care of your house.
you were in trouble
Then I can come in the moment…!!

 

 

 

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