.

जूही की महक कहानी : भाग- 4, लेखक श्याम कुंवर भारती joohee kee mahak kahaanee : bhaag- 4, lekhak shyaam kunvar bhaaratee

©श्याम कुंवर भारती

परिचय- बोकारो, झारखंड


 

 

थोड़ी देर में सुधीर जूही की गाड़ी के पास स्टेशन से बाहर आया जहा वो उसका इंतजार कर रहा था। मैडम आप चले मैं अपनी बाइक से आता हूं उसने जूही से अनुरोध किया।

 

तुम्हारी बाइक मेरा ड्राइवर ले आएगा अगर तुम मेरी गाड़ी चला सकते हो तो बोलो चला लोगे। जूही ने पूछा।

 

जी मैडम मैं फोर व्हीलर भी चला लेता हूं सुधीर ने जवाब दिया।

 

ठीक है फिर उसने अपने ड्राइवर से कहा – रामु तुम सुधीर की बाइक लेकर मेरे निवास पर लगाकर अपने घर चले जाना मैं सुधीर के साथ जिला जा रही हूं दो तीन घंटे में लौट आऊंगी। डी डी सी साहब से उनके निवास पर मिलना है।

 

ठीक है मैडम रामु ने कहा और सुधीर से उसकी बाइक की चाबी लेकर चला गया।सुधीर अब ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया और गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दिया।

 

सुधीर को चुपचाप गाड़ी चलाता देख जूही ने पूछा तुम चुप क्यों हो। लगता है मेरी डांट से नाराज हो गए हो। जूही सामने वाली सीट पर सुधीर के बगल में बैठी हुई थी।

 

अरे नहीं मैडम मैं आपसे क्यों नाराज होने लगा। सुधीर ने जवाब दिया।

 

और पूछोगे नहीं हम दोनों कहा जा रहे है। जूही ने पूछा। पूछना क्या है मैडम अभी तो आपने बताया न हमलोग जिला जा रहे हैं डीडीसी साहब के निवास पर। वैसे भी आप जहा चलेंगी मैं तो आपका ड्राइवर बन ही चुका हूं सुधीर ने कहा।

 

इतना सुनते ही जूही जोर जोर से हंसने लगी। अरे नहीं मैं तुम्हे अपना ड्राइवर क्यों बनाऊंगी। दरअसल मैं डीडीसी साहब के यहां तुम्हारे लिए ही जा रही हूं। साथ ही आज मैं तुम्हारे साथ अकेले में बिताना चाहती हूं।तुमसे अपने बारे में और तुम्हारे बारे में बात करना चाहती हूं। जूही ने गंभीर होकर कहा।

 

सुधीर मैंने सुना है जिला में सीटी पार्क बहुत सुंदर है और संडे को बड़ी भीड़ भाड़ रहती है। वहा एक रेस्टुरेंट भी है। साहब से मिलकर हम दोनो वही चलेंगे और साथ में खाना खायेंगे।मगर चिंता मत करो सारा खर्चा मैं करूंगी।

 

ऐसी बात नहीं मैडम शुबह में तीन चार ट्रेनें आती है। आज मैं पांच सौ रुपए की कमाई कर चुका हूं।इतने रूपए में तो आपको खिला ही सकता हूं।

 

अच्छा तो तुम अपनी सारी कमाई मुझ पर खर्च दोगे तो घर जाकर अपनी मां को क्या दोगे।इतना कहकर जूही हसने लगी।

 

सुधीर कुछ नहीं बोला। नाराज मत होना मैं तो मजाक कर रही थी। मां से याद आया तुम अपनी मां के फोन कर बता दो की तुम मेरे साथ जिला जा रहे हो चिंता न करें।जूही ने सुधीर को याद दिलाया।

 

सुधीर ने अपनी मां को फोन कर सब बता दिया।

 

सुधीर बताओ तुम दिन भर में कितना कमा लेते हो जूही ने पूछा।तुमसे हिस्सा लेने के लिए नहीं बस ऐसे ही जानकारी के लिए पूछी।जूही ने हंसते हुए पूछा।

 

मैडम कोई फिक्स आमदनी नहीं होती है। कभी पांच सौ कभी रात में एक दो सवारी मिल गई तो उसका भाड़ा पांच सौ से हजार रूपए मिल जाता है। औसतन हजार पांच सौ कभी दो तीन सौ पर ही गुजारा करना पड़ता है सुधीर ने कहा।

 

मतलब महीने का बीस पच्चीस हजार कमा लेते हो।जूही ने हिसाब लगाते हुए कहा। जी मेडम बस यही समझ लीजिए सुधीर ने कहा।

 

लेकिन मैं चाहती हूं तुम पुलिस ऑफिसर बनने से पहले महीने का एक डेढ़ लाख कमाई कर लो।

 

चाय बेचना और रात में अपनी बाइक से सवारी ढोना बंद कर दो।इसमें जान का भी जोखिम है। जैसे उस रात हुआ। जूही ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा।

 

मैं तुम्हारी ईमानदारी बहादुरी शराफत और मेहनत से बहुत प्रभावित हूं सुधीर। तुमने उस रात अंजान जगह में मेरी जान ही नहीं इज्जत भी बचाई और मेरा साथ दिया इस दरम्यान तुम काफी घायल भी हो गए। तुम्हारी जान भी जा सकती थी।जूही ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा।

 

मेडम उस रात आप मेरी सवारी थी। आपने मुझ पर लड़की होकर भरोसा किया।मैं आपका भरोसा कैसे तोड़ सकता था। और फिर ये तो मेरा धंधा भी था। मैं अपने धंधे से बेईमानी कैसे कर सकता था। उस रात आपकी जगह कोई और सवारी होती तो भी उसके लिए वैसे ही लड़ता जैसे आपके लिए लड़ा और आपकी मदद किया।यह तो आपका बड़प्पन है जो मुझे इतना सम्मान दे रही हैं।सुधीर ने अपना विचार प्रकट करते हुए कहा।

 

इसलिए तो मैं तुमसे प्रभावित हूं।जूही ने उसकी तरफ देखते हुए कहा।

 

अब तुम मेरी योजना सुनो जो तुम्हारे लिए बनाई है।पहली तो यह की एक सवारी गाड़ी तुम्हे बैंक से लोन लेकर दिलवा दूं जो दिन भर स्टेशन से शहर तक सवारी ढोते रहेगी तुम एक ड्राइवर रख लेना। इससे यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी और तुम्हे आमदनी भी होगी। दूसरा की यदि तुम चाहो तो तुम ब्लॉक और जिला का टेंडर लेकर काम कर सकते हो।

 

मेरे यहां बहुत सारी योजनाएं चलती है कई लोग ठिका का काम करते है जैसे भवन निर्माण,सड़क निर्माण,चेक डेम कुंआ तालाब आदि। इससे तुम्हे काफी आमदनी हो सकती है। मुझे विश्वास है तुम पूरी ईमानदारी से काम करोगे और मेरे रहते तुम्हे किसी को एक रुपया कमीसन भी नहीं देना होगा।तीसरी योजना है की यदि डीडीसी साहब चाहेंगे तो तुम्हे जिला कार्यालय में कांट्रेक्ट पर अच्छी जॉब दिला सकते है।जब तक तुम करना चाहो कर सकते हो। फिर तुम्हारी पुलिस में नियुक्ति होते ही सब छोड़ सकते हो।

 

जूही ने अपनी योजना सुनाते हुए कहा।

 

अब तुम बोलो तुम्हारी क्या योजना है जूही ने सुधीर से पूछा।

 

जी मैडम मैं क्या बोलूं। चाय दुकान तो आपने बंद ही करा दिया है। मुझे अपने परिवार के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा। आपको जैसा उचित लगे करे।सुधीर ने हामी भरते हुए कहा।

 

एक बात और मेरी एक बड़ी खराब आदत है सुधीर मैं जिसको मानती हूं अगर उसने मेरी बात नहीं मानी तो मेरा गुस्सा आ जाता हैं जैसे आज आया और तुमने मेरी डांट सुन लिया। अब आगे से ध्यान रखना। जूही ने हंसते हुए कहा।

 

जी ठीक है मैडम सुधीर ने धीरे से कहा।

 

बातो ही बातो मे दोनो कब जिला पहुंच गए पता ही नहीं चला।

 

जूही ने सुधीर को डीडीसी साहब से मिलवा दिया।उन्होंने सुधीर का सारा पेपर ऑफिस में जमा करने को कहा और आश्वाशन दिया कि यथा संभव मदद करेंगे।

 

इसके बाद दोनो सिटी पार्क चले गए दोनो ने साथ खाना खाया। फिर दोनों गुलाबो की खूबसूरत क्यारियों को देखते हुए पूरे पार्क का आनंद लेने लगे।

 

 

शेष भाग* पांच में।

 

 

श्याम कुंवर भारती

Shyam Kunwar Bharti


 

 

Juhi Ki Mehak Kahani : Part 4, Writer Shyam Kunwar Bharti

 

 

After a while Sudhir came out of the station near Juhi’s car where he was waiting for her. Madam you go, I will come on my bike, he requested Juhi.

 

My driver will bring your bike, if you can drive my car, then say you will drive. Juhi asked.

 

Sir, I can drive a four wheeler too, replied Sudhir.

 

Ok then he said to his driver – Ramu, you take Sudhir’s bike and put it at my residence and go to your house, I am going to the district with Sudhir, I will return in two to three hours. Have to meet DDC sahib at his residence.

 

Ok Madam Ramu said and went away with Sudhir taking his bike key.

 

Seeing Sudhir driving quietly, Juhi asked why are you silent. Looks like you have become angry with my scolding. Juhi was sitting next to Sudhir in the front seat.

 

Oh no ma’am why I started getting angry with you. Sudhir replied.

 

And don’t you ask, where are we both going. Juhi asked. What is to be asked, madam, you have told us that we are going to the district at the residence of DDC sahib. Anyway, wherever you will go, I have already become your driver, said Sudhir.

 

Hearing this, Juhi started laughing out loud. Oh no, why would I make you my driver? Actually I am going to DDC sir’s place for you only. Also, I want to spend today alone with you. I want to talk to you about myself and about you. Juhi said seriously.

 

Sudhir I have heard that the City Park in the district is very beautiful and there is a huge crowd on Sundays. There is also a restaurant. Meeting sir, both of us will walk the same and eat food together. But don’t worry, I will bear all the expenses.

 

No such thing, madam, three or four trains come in the morning. Today I have earned five hundred rupees. I can feed you with that much money.

 

Well, if you spend all your earnings on me, then what will you give to your mother after going home. Juhi started laughing after saying this.

 

Sudhir didn’t say anything. Don’t be offended, I was joking. You remembered from mother, call your mother and tell that you are going to district with me, do not worry. Juhi reminded Sudhir.

 

Sudhir called his mother and told everything.

 

Tell Sudhir, how much do you earn in a day, Juhi asked. Not asking you to participate, just for such information. Juhi asked with a laugh.

 

Madam, there is no fixed income. Sometimes five hundred and one or two rides are found in the night, then its fare is five hundred to thousand rupees. On an average, one has to live on one thousand five hundred and two or three hundred only, said Sudhir.

 

Means you earn twenty twenty five thousand a month. Juhi said while calculating. Sir, just understand this, Sudhir said.

 

But I want you to earn one and a half lakh a month before becoming a police officer.

 

Stop selling tea and riding your bike at night. There is also a risk of life. Like what happened that night. Juhi expressed concern.

 

I am very impressed by your honesty, bravery, kindness and hard work Sudhir. You not only saved my life but also my honor in an unknown place that night and supported me, in the meantime you were also injured a lot. You could have lost your life too. Juhi said expressing her concern.

 

You were my ride that night, ma’am. You trusted me as a girl. How could I break your trust? And then this was my business too. How could I be dishonest in my business? If someone else was riding in your place that night, he would have fought for him as he fought for you and helped you. It is your nobility that is giving me so much respect.

 

That’s why I am impressed with you. Juhi said looking at him.

 

Now you listen to my plan which has been made for you. First of all, I should get you a passenger car by taking loan from the bank, which will carry the ride from the station to the city throughout the day, you hire a driver. This will also provide convenience to the passengers and you will also earn income. Second, if you want, you can work by taking tender of block and district.

 

There are many schemes going on in me, many people do the work of accommodation like building construction, road construction, check dam, well, pond etc. This can give you a lot of income. I believe that you will work with complete honesty and you will not have to pay even one rupee commission to anyone during my stay. The third plan is that if DDC sir wants, then you can get a good job on contract in the district office. As long as you want to do it. You can Then everyone can leave as soon as you are appointed in the police.

 

Juhi said while narrating her plan.

 

Now you say what is your plan, Juhi asked Sudhir.

 

Sir what should I say? You have already closed the tea shop. I have to do something for my family. Do as you like. Sudhir said, agreeing.

 

One thing and I have a very bad habit, Sudhir, whom I believe, if he does not listen to me, then I get angry like today came and you listened to my scolding. Now take care from now on. Juhi said with a laugh.

 

Yes, Madam Sudhir said softly.

 

It was not known when both of them reached the district in talks.

 

Juhi introduced Sudhir to DDC sahib. He asked Sudhir to submit all the papers in the office and assured that he would help as much as possible.

 

After this both went to City Park, both had dinner together. Then both of them started enjoying the whole park looking at the beautiful beds of Gulabo.

 

Remaining part* in five.

 

 

 

Juhi Ki Mehak Part 3 Author – Shyam Kunwar Bharti

Related Articles

Back to top button