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बिलकिस बानो केस में सजा सुनाने वाले जज ने सरकार के फैसले पर खड़े किए सवाल bilakis baano kes mein saja sunaane vaale jaj ne sarakaar ke phaisale par khade kie savaal

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | गुजरात दंगे के दौरान गैंगरेप की शिकार हुईं बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत इस मामले में सुनवाई को तैयार है। गैंगरेप के इन दोषियों को सजा सुनाने वाले जज ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि राजनेताओं द्वारा इन दोषियों का हार पहनाकर स्वागत करना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

 

बॉम्बे हाई कोर्ट से रिटायर जस्टिस यूडी साल्वी ने कहा , जिसने भी यह फैसला लिया है पहले उसे ही इसपर विचार करना चाहिए। मैं केवल यही कह सकता हूं। उन्होंने कहा, इस मामले में सारी प्रक्रिया का अनुपालन किया गया था और मैं कह सकता हूं कि पुख्ता सबूतों की बिना पर ही 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

 

जस्टिस साल्वी ने कहा, सरकार के पास रिहाई देने का आधिकार है लेकिन पहले उसे सारे तथ्यों पर विचार कर लेना चाहिए। उसे सोचना चाहिए कि इस फैसले से समाज पर क्या असर पड़ेगा। मुझे तो यह भी नहीं पता कि सरकार ने पूरी प्रक्रिया का अनुपालन किया भी है या नहीं।

 

रिहाई के बाद दोषियों का जिस तरीके से स्वागत किया गया, मिठाई खिलाई गई और हार पहानाया गया, उसकी भी जज ने आलोचना की है। बता दें कि एक भाजपा विधायक ने यहां तक कहा कि वे ब्राह्मण हैं और अच्छे संस्कार वाले हैं। जस्टिस साल्वी ने कहा, ये सब तो अलग की बात है लेकिन जिस तरह से उनका स्वागत किया गया वह बिल्कुल ठीक नहीं है। कुछ लोग कह रहे हैं कि वे ब्राह्णण हैं। यह कहना भी ठीक नहीं है।

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उन्होंने कहा, जब कोई भी सरकार किसी की सजा माफ करती है तो उसे पहले उसके अपराध के बारे में विचार करना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि ऐसा किया गया। दोषियों ने कभी माफी भी नहीं मांगी, उन्हें अपराध बोध नहीं था। उन लोगों ने आराम से फूल माला स्वीकार कर ली। इसका मतलब उन्हें आज भी अपने अपराध पर पछतावा नहीं है।

 

 

The judge who sentenced in the Bilkis Bano case raised questions on the decision of the government

 

 

New Delhi | [Court Bulletin] | The matter of the release of the convicts of Bilkis Bano, who was gangraped during the Gujarat riots, has reached the Supreme Court. The court is ready to hear the matter. The judge, who sentenced these gang-rape convicts, has strongly criticized this decision and said that it is not at all appropriate for politicians to welcome these convicts wearing necklaces.

 

Justice UD Salvi, retired from the Bombay High Court, said, whoever has taken this decision should first consider it. I can only say this. “In this case, the entire procedure was followed and I can say that 11 convicts were sentenced to life imprisonment without strong evidence,” he said.

 

Justice Salvi said, the government has the right to grant release but first it should consider all the facts. He should think about what effect this decision will have on the society. I don’t even know whether the government has followed the entire process or not.

 

The judge has also criticized the manner in which the convicts were welcomed, fed sweets and garlanded after their release. Let us tell you that a BJP MLA even said that he is a Brahmin and has good values. Justice Salvi said, all this is a different matter but the way he was welcomed is not at all right. Some people are saying that they are brahmins. It’s not right to say that either.

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He said, when any government waives off someone’s sentence, it should first think about his crime. I don’t think this has been done. The convicts never even apologized, they had no sense of guilt. They readily accepted the flower garland. This means they do not regret their crime even today.

 

 

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