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जिला उपभोक्ता फोरम का आदेश रद्द कर राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा- कंपनी को ही जांचना होगा बीमा लेने वाला पहले से बीमार है या नहीं jila upabhokta phoram ka aadesh radd kar raajy upabhokta aayog ne kaha- kampanee ko hee jaanchana hoga beema lene vaala pahale se beemaar hai ya nahin

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | बीमा कंपनियां पहले से बीमारी होने को आधार बनाकर मेडिक्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती हैं। यह बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि पॉलिसी जारी करते वक्त ही वह बीमाधारक की जांच कराए कि उसे पहले से कोई बीमारी है या नहीं। जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को रद्द करते हुए दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिए अहम फैसले में उक्त बातें कही।

 

आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य राजन शर्मा की बेंच ने बीमा कंपनी के पक्ष में पारित जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला दिया।

 

फोरम ने बीमा कंपनी द्वारा दिल्ली निवासी बीमाधारक एस.एस. जसपाल को पहले से मधुमेह होने के आधार पर इलाज का खर्च नहीं दिए जाने को सही ठहराया था।

 

उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड व अन्य को आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता के इलाज पर हुए खर्च की रकम 3,20,126 रुपये का छह फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करे। भुगतान के लिए दो माह का समय दिया गया है।

 

इन बीमारियों पर नहीं मिलता पैसा

 

शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्निया, मोतियाबिंद, रीढ़ की हड्डी में रसौली जैसी बीमारियों की जानकारी नहीं दिए जाने पर बीमा कंपनी मेडिक्लेम का लाभ नहीं देती हैं, लेकिन यदि इन बीमारियों की जानकारी दी जाती है तो कुछ कंपनी बीमा लेने के 24 माह बाद तो कुछ 36 माह बाद इन बीमारियों के इलाज का खर्च देती हैं।

 

कुछ बीमा कंपनियां कैंसर जैसी बीमारी के लिए मेडिक्लेम का लाभ नहीं देती हैं या देती हैं तो प्रीमियम अधिक होता है।

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By canceling the order of the District Consumer Forum, the State Consumer Commission said – the company itself will have to check whether the insurance taker is already sick or not.

 

New Delhi | [Court Bulletin] | Insurance companies cannot deny mediclaim on the basis of pre-existing disease. It is the responsibility of the insurance company to get the insured checked whether he has any pre-existing disease or not while issuing the policy. The Delhi State Consumer Commission, while canceling the order of the District Consumer Forum, said the above things in an important decision.

 

A bench of the commission’s chairperson Justice Sangita Dhingra Sehgal and member Rajan Sharma gave this decision while setting aside the order of the District Consumer Forum passed in favor of the insurance company.

 

The Forum has directed the Delhi resident insured S.S. Jaspal was justified in not paying the cost of treatment on the ground that he was already diabetic.

 

The Consumer Commission has ordered the National Insurance Company Limited and others to pay the amount of Rs 3,20,126 incurred on the treatment of the complainant along with six per cent interest. Two months time has been given for payment.

 

 Money is not available on these diseases

 

The insurance company does not give the benefit of mediclaim if the information about diseases like sugar, high blood pressure, hernia, cataract, neoplasm in the spinal cord is not given, but if these diseases are given, then some companies after 24 months of taking the insurance So some give the cost of treatment of these diseases after 36 months.

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Some insurance companies do not offer or do not provide mediclaim benefits for diseases like cancer, so the premiums are high.

 

 

 

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