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गुरु के सन्मार्ग से, चमक उठा मेरा संसार, गुरु आपके श्रीचरणों में, मेरा नमन करो स्वीकार | ऑनलाइन बुलेटिन

©प्रियंका महंत

परिचय- रायगढ़, छत्तीसगढ़.


 

 

शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग़ में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है, जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।

 

शिक्षक दिवस 5 सितम्बर 1962 से मनाते आ रहे हैं, और इसे हम शिक्षक दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं???

 

और 5 सितम्बर को ही क्यों मनाते हैं???

 

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से हम भलिभांति परिचित हैं, आपका जन्म तमिलनाडु राज्य के ग्राम तिरूतनी में 5 सितम्बर 1888 में हुआ था।

 

आप भारत देश के प्रथम उपराष्ट्रपति व द्वितीय राष्ट्रपति (1962-67) बने, आप भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात, शिक्षाविद, महान दार्शनिक, हिन्दू विचारक, दर्शनशास्त्री, लेखक, एक आदर्श शिक्षक व पटुवक्ता थे।

 

दरअसल 13 मई, 1962 को जब डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रपति बने, तब उनके छात्रों ने बड़े स्तर पर उनका जन्मदिवस मनाने की स्वीकृति मांगी, तो इस पर डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि अगर वे इस दिन को देश भर के शिक्षकों के सम्मान में शिक्षक दिवस के रूप में मनाएं तो मुझे गर्व होगा।

 

इस तरह देश भर में पहली बार 5 सितम्बर 1962 डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

 

अब, डा.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम के पूर्व सर्वपल्ली से संबोधन क्यों किया जाता है?तो यह आपको विरासत में मिली है, क्योंकि आपके पूर्वज “सर्वपल्ली” नामक गांव में रहते थे, और 18वीं शताब्दी के मध्य में वे तिरूतनी नामक गांव में बस गये, लेकिन उनके पूर्वज चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के गांव का बोध भी सदैव रहना चाहिए,इसी कारण आपके नाम के पूर्व सर्वपल्ली सम्बोधन किया जाने लगा।

 

आप बचपन से किताबें पढ़ने के शौकीन थे। आपके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी,माता सिताम्मा व पत्नी सिवाकमु थी।

 

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे एक ऐसे ही प्रकाश स्तम्भ हैं,वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे, उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है और यही आदर्श समाज संरचना का आधार है, आपने अपनी जीवन के 40 वर्ष  आदर्श शिक्षक के रूप में व्यतीत किये।

 

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की कुछ पुस्तकें 1) द एथिक्स आफ वेदांत, 2) रिलीजन एंड सोसायटी, 3) द एसेंसिअल आफ साइकोलॉजी जैसी अनेक पुस्तकें आपके द्वारा लिखी गई है।

 

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को सन् 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था व सर्वपल्ली राधाकृष्णन 17 अप्रैल 1975में स्वर्गवासी हो गये।

 

 

प्यारे बच्चों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए। सम्माननीय गुरूजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

 

जय हिन्द

 

 

बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की जरूरत | ऑनलाइन बुलेटिन

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