.

छुआछूत छोड़ सभी अब मानवता से प्यार करो chhuaachhoot chhod sabhee ab maanavata se pyaar karo

©जलेश्वरी गेंदले, शिक्षिका

परिचय- मुंगेली, छत्तीसगढ़.


 

मैं हूं सहज- सरल

जानूं न कोई कपट

मन में हो भाई चारा

हर इंसान लगे हमें प्यारा

बस रहे मन में दया ,

हो करुणा, दान करम।

जाने न मन झूठ लबारी

कहे मन जाना है

एक दिन छोड़ प्रकृति

इंसान हो तुम भी

फिर काहे का है अभिमान

मासूमियत की कर पहचान

मानवता से प्यार करो।

 

हम रहे अनजान

सब को माने है समान

फिर क्यों तेरे कांधे में है तीर कमान

क्यों लिए हो फर्शा- भाल

क्यों बुन रखे मानव -मानव में भेद का जाल

फैला रखे हो उच्च -नीच का भाव

क्या दर्द का तुम्हे नहीं होता आभास या

फिर तुम नहीं हो इंसान

ना करे भेद जल, अग्नि, धरती,

आकाश, पुरवाई

तुम काहे बन रहे हो कसाई

फूल से मुस्कान क्यों तेरे मन को नहीं है भाए

वह दिन कब आए

मन से इनके उच्च नीच भेदभाव

का बीज नष्ट हो

आपस में सब एक हो

मानवता से प्यार करो।

 

 

 

जलेश्वरी गेंदले

Jaleshwari Gendle


 

 

leave untouchability all love humanity now

 

I am simple
I don’t know any fraud
be in mind brother fodder
everyone loves us
There is mercy in my mind,
Yes, do charity.
Don’t know the lie
say you have to go
one day leave nature
you are human too
What’s the pride then?
recognition of innocence
love humanity.

we are unknown
everyone is considered equal
Then why is the arrow in your shoulder
Why have you taken the floor?
Why should we keep a web of distinction between human beings
spread high and low feelings
Do you not feel the pain or
then you are not human
Do not differentiate water, fire, earth,
sky, east
why are you becoming a butcher
Why don’t you like a smile with a flower?
when did that day come
their high and low discrimination from the mind
destroy the seed
be one with each other
love humanity.

कल्पना चावला | ऑनलाइन बुलेटिन
READ

 

 

… बड़े बाबू की बात सुन जूही बोली- मैं किसी से डरने वाली नहीं हूं, मैं जैसा कह रही हूं वैसा करें, आगे जो होगा देखा जाएगा … पढ़ें, लेखक- श्याम कुंवर भारती की कहानी जूही की महक का सांतवा भाग … bade baaboo kee baat sun joohee bolee- main kisee se darane vaalee nahin hoon, main jaisa kah rahee hoon vaisa karen, aage jo hoga dekha jaega … padhen, lekhak- shyaam kunvar bhaaratee kee kahaanee joohee kee mahak ka saantava bhaag

Related Articles

Back to top button