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ठहरना भी जरूरी है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

©पूनम सुलाने-सिंगल

परिचय- श्रीनगर से….


 

 

ठहरना एक बीज का

उसे वृक्ष में परिवर्तित करता है।

ठहर जाए जहाँ पर नदी

वहाँ रूप उसका सागर बनता है।

 

ठहरना भटकी दिशाओं से

तब जाकर लक्ष्य दिखता है

ठहर जाए जहाँ पर साजिशें

रिश्ता वहीं पर मजबूत बनता है

 

ठहरना बिखरे विचारों का

नए विचारों को निर्माण करता है।

ठहर जाए जहाँ पर बादल

बन बूंदे बारिश की बरसता है।

 

ठहरना आपस की लड़ाई का

दुश्मनों की हार करता है।

ठहर जाए जहाँ अधर्म का साथ

वहीं पर धर्म विजयी बनता है।

 

टहरना पारस संग लोहे का

अनमोल सोने में उसे बदलता है।

ठहर जाए जहाँ अंधियारी रात

वही नए सवेरे का जन्म होता है।

 

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