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सफ़र ज़िन्दगी का safar zindagee ka

©कुमार अविनाश केसर

परिचय– मुजफ्फरपुर, बिहार


सफ़र ज़िन्दगी का…

बस इतना – सा टुकड़ा है….

तयशुदा सफ़र अब दीवार पर….

फोटूओं में जकड़ा है…

तू –

किस बात के लिए अकड़ा है?

 

अभी कल तक…

चल रहे थे जो क़दम…

डगमगा… दीवार पर चढ़ने लगे।

ये भी क्या मजबूरियाँ हैं आदमी की!

ऐ इंसां!

तुझे किस बात का नखड़ा है?

 

आदमी….

ज़िंदगी भर चलता है बस…..

दो गज़ के लिए!

होके पामाल बिखरता है….

सजधज के लिए!

ऐ ज़िन्दगी!

तू ही बता ये क्या लफड़ा है… ?

 

 

कुमार अविनाश केसर

©Kumar Avinash Kesar

 

 

journey of life

 

 

Journey of life…
It’s just a piece….
The fixed journey is now on the wall….
Stuck in photos…
you –
What is it for?

Till yesterday…
The steps that were going on…
Stagger… Started climbing the wall.
What are the compulsions of man!
Oh man!
What’s wrong with you?

Man….
Life goes on only…..
For two yards!
Hokay the palm is scattered….
For finesse!
O life!
You tell me what is this ruckus…?

 

 

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