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सिद्धिका siddhika

©डॉ.रूपा व्यास

परिचय- रावतभाटा, राजस्थान.


 

 

मैं हूं, सिद्धिका

और मैं अपने

सम्मान-अधिकार के लिए

तब-तक संघर्ष करूँगी

जब-तक मुझे न्याय ने

मिल जाए।

कहती हूं, अपनी कहानी

जो सपना मैंने अपने

माता-पिता व विद्यालय

‘हैप्पी आर्स, रायला, भीलवाड़ा

परिवार सहित देखा।

दसवीं में, उपखंड स्तर पर प्रथम आने का

वो पूरा हुआ, 97 % अंकों के साथ

खुशी का ठिकाना न रहा।

लेकिन मुझे क्या पता था,

ये खुशी पल-भर की है।

मेरे साथ अन्याय कर,

न जाने किस आधार पर

93% अंक छात्र आमीर

को सम्मानित किया गया।

जो सर्वथा गलत है।

मैं पूछती हूं, उपखण्ड अधिकारी जी से…

मैं पूछती हूं, जिला शिक्षा अधिकारी जी से…

मैं पूछती हूं, सम्मान करने वाले समाज के ठेकेदारों से…

आखिर मुझे दसवीं में

सर्वश्रेष्ठ आने पर भी

प्रोत्साहित क्यों नहीं किया गया?

मेरे स्थान पर कम अंक छात्र को

क्यों सम्मान किया गया?

क्या आप निर्णय लेने में असक्षम हैं,

तो हमें दीजिए, आपके पद

पर कार्य करने का अधिकार

ताकि हम सही निर्णय कर सकें।

 

 

 

Dr. Roopa Vyas


 

 

siddhika

 

 

 

I am Siddhika
and i my
for the right
I will fight till then
until I get justice
Get it.
tell my story
the dream i had
parents and school
Happy Hours, Rayla, Bhilwara
Seen with family.
In the tenth, to come first at the subdivision level
He completed with 97% marks
Happiness knew no bounds.
But what did I know
This happiness is momentary.

do me injustice
I don’t know on what basis
93% marks student Amir
was awarded.
Which is totally wrong.
I ask the sub-divisional officer ji…
I ask, District Education Officer ji…
I ask, to the contractors of the respecting society…
finally i in tenth
even when the best
Why not encouraged?
less marks to the student in my place
Why was it respected?
are you incapable of making decisions,

कहानी, जूही की महक का 10 वां भाग, लेखक- श्याम कुंवर भारती kahaanee, joohee kee mahak ka 10 vaan bhaag, lekhak- shyaam kunvar bhaaratee
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so give us, your post
right to work
so that we can make the right decision.

 

 

बंद होते सरकारी स्कूल band hote sarakaaree skool

 

 

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