.

ये जिंदगी के रास्ते…

©गायकवाड विलास 

परिचय- मिलिंद महाविद्यालय लातूर, महाराष्ट्र


 

कहां कहां घूम रहा है तू बनके मुसाफ़िर,

ये जिंदगी के रास्ते,यहां कब खत्म होते है।

 

चाहे तो जन्नत है ये जिंदगी,ना चाहे तो मुसीबत,

उस सजाओ या बिगाडो ये सबके कर्मों का खेल है।

 

सिर्फ तस्वीर बनाकर,उसमें कहां आती है सुन्दरता,

रंगों के बिना हर तस्वीर उजड़े चमन जैसी लगती है।

 

जन्नत की आरजू कौन नहीं चाहता इस संसार में,

मगर हर किसी के कर्मों में चन्दन सी महक कहां होती है।

 

बुराई और अच्छाई कभी किसी कोख से जन्म नहीं लेती,

फिर भी कई मां ओ की कोख ही यहां बदनाम है।

 

जो मिला है वहीं है तेरे लिए अनुपम सौगात,

ये मिली जिंदगी भी किसी सौगात से कम नहीं है।

 

कहां कहां घूम रहे है तू बनके मुसाफ़िर,

ये जिंदगी के रास्ते,यहां कब खत्म होते है।

 

Gaikwad-Vilas-Latur-Maharashtra
गायकवाड विलास

? सोशल मीडिया

 

फेसबुक पेज में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://www.facebook.com/onlinebulletindotin

 

व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/Cj1zs5ocireHsUffFGTSld

 

ONLINE bulletin dot in में प्रतिदिन सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाएं, परीक्षा पाठ्यक्रम, समय सारिणी, परीक्षा परिणाम, सम-सामयिक विषयों और कई अन्य के लिए onlinebulletin.in का अनुसरण करते रहें.

 

? अगर आपका कोई भाई, दोस्त या रिलेटिव ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन में प्रकाशित किए जाने वाले सरकारी भर्तियों के लिए एलिजिबल है तो उन तक onlinebulletin.in को जरूर पहुंचाएं।

 

ये खबर भी पढ़ें:

मेरे पति चाहते हैं कि मैं उसके बॉस के साथ संबंध बना लूं, पति की इस समस्या… | My Story

 


Back to top button