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टारगेट कर बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट में बोली UP सरकार, एक ही समुदाय भारतीय taaraget kar buladojar aikshan par supreem kort mein bolee up sarakaar, ek hee samudaay bhaarateey

UP Bulldozer Action News: नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | उत्तर प्रदेश में बुलडोजर ऐक्शन पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त 2022 की तारीख तय की है।

 

केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा, ‘नियम का पालन होना चाहिए। इसमें कोई विवाद नहीं है। यदि निकाय के नियमों के मुताबिक निर्माण अवैध है तो फिर हम कैसे उसे गिराने से रोकने के लिए अथॉरिटीज को आदेश दे सकते हैं।’

 

जमीयत ने लगाया सेलेक्टिव ऐक्शन का आरोप

 

जमीयत के वकील ने कहा कि दंगा करने के आरोपियों के खिलाफ सरकार चुनकर कार्रवाई कर रही है। सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने कहा, ‘कोई किसी अपराध में आरोपी है तो उसके घरों को गिराने की कार्रवाई हमारे समाज में स्वीकार नहीं की जा सकती। हम कानून के शासन से चलते हैं।’

 

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी यूपी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, सिर्फ इसलिए उसके अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई रोकी नहीं जा सकती।

 

देश में सिर्फ एक ही समुदाय भारतीय

 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अखबार की खबरों के आधार पर अदालत में पक्ष नहीं रखना चाहिए। इस पर याची के वकील ने कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जब पुलिस ने आरोपियों के घरों को गिराने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, ‘एक समुदाय को चुनकर उस पर ऐक्शन लिया जा रहा है। पूरा सैनिक फार्म ही अवैध है, लेकिन बीते सालों में उस पर कोई ऐक्शन नहीं हुआ।

 

दिल्ली में ही अवैध फार्म हाउस देख सकते हैं। कोई ऐक्शन नहीं हुआ। चुनकर कार्रवाई की जा रही है।’ याची के वकील के इस तर्क पर गहरी आपत्ति जताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश में कोई दूसरा समुदाय नहीं है। सिर्फ एक ही समुदाय है, जिसे हम भारतीय कहते हैं।

 

दंगे से पहले शुरू हुआ था ऐक्शन

 

यूपी सरकार के वकील ने कहा कि ऐसे आरोप ठीक नहीं है। अथॉरिटीज ने यह प्रक्रिया दंगों से पहले ही शुरू कर दी थी। इसके अलावा जिनके अवैध निर्माणों को गिराया गया है, उन्हें पहले ही नोटिस देकर कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई थी।

 

 

 

UP government bid in Supreme Court on targeting bulldozer action, only one community Indian

 

UP Bulldozer Action News: New Delhi | [Court Bulletin] | The Supreme Court has refused to pass any interim order on a petition seeking a stay on the bulldozer action in Uttar Pradesh. Along with this, the court has fixed August 10, 2022 for the next hearing.

 

During the hearing of the case, a bench of Justices BR Gavai and PS Narasimha said, ‘The rule should be followed. There is no dispute in this. If the construction is illegal as per the rules of the body, then how can we order the authorities to stop the demolition.

 

 Jamiat alleges selective action

 

Jamiat’s lawyer said that the government is selectively taking action against the accused of rioting. Senior advocate Dushyant Dave said, “If someone is accused of a crime, then the action of demolishing his house cannot be accepted in our society. We go by the rule of law.’

 

During this, senior advocate Harish Salve also presented the side of the UP government. He said that the action of removal of illegal constructions cannot be stopped just because a person is an accused in a case.

 

 Indian only one community in the country

 

Along with this, he said that the petitioners should not present their side in the court on the basis of newspaper reports. On this, the counsel for the petitioner said that there are many such cases, when the police announced the demolition of the houses of the accused. He said, ‘Action is being taken by selecting a community. The entire Sainik Farm itself is illegal, but no action has been taken on it in the last years.

 

Illegal farm house can be seen in Delhi itself. No action took place. Selective action is being taken. Taking strong objection to this argument of the counsel for the petitioner, Solicitor General Tushar Mehta said that there is no other community in the country. There is only one community, which we call Indians.

 

 Action started before the riots

 

The counsel for the UP government said that such allegations are not correct. The authorities had started this process even before the riots. Apart from this, those whose illegal constructions have been demolished, they were informed about the action by giving notices in advance.

 

 

 

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