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दिखाई नहीं देता dikhaee nahin deta

©द्रौपदी साहू (शिक्षिका)

परिचय– कोरबा, छत्तीसगढ़


 

 

चुनाव आते ही हाथ जोड़, वोट मांगने आते हैं नेता।

जीतने के बाद किसी की समस्या, उन्हें दिखाई नहीं देता। ।

 

अमीरों के लिए गरीबी रेखा का, राशन कार्ड़ बनवाते हैं।

गरीबों को एक काम के लिए, दस बार दौड़ाते हैं। ।

 

किसी काम के लिए, भारी-भरकम घूस वो लेते।

किसी की दीन दशा, उन्हें दिखाई नहीं देते। ।

 

अपना कर्तव्य समझकर, कोई कार्य नहीं करते।

लोग तो लोग हैं, भगवान से भी नहीं ड़रते। ।

 

लालच में पड़कर सभी, स्वार्थी हो गए हैं नेता।

आज के दौर में इमानदारी, कई दिखाई नहीं देता। ।

 

मांगे अगर मदद कोई, तो अंगूठा दिखाते हैं।

अपनी बारी आने पर, मक्खन लगाते हैं। ।

 

कभी मदद भी करते हैं, तो प्रसिद्धि पाने के लिए।

फोटो खिंचवा लेते हैं, पेपर छपवाने के लिए। ।

 

गरीब अपनी व्यथा सुनाये, तो उसकी सुनवाई नहीं होती।

यह कलयुग है यहां, किसी की नियत दिखाई नहीं देती। ।

 

 

©Draupadi Sahu, Korba, Chhattisgarh

Draupadi Sahu

 

 

Can not see

 

 

As soon as elections come, leaders come to ask for votes with folded hands.
After winning, they do not see anyone’s problem. ,

 

Poverty line, get ration cards made for the rich.
Run the poor ten times for one work. ,

 

For some work, he would take hefty bribes.
They do not see the poor condition of anyone. ,

 

Considering their duty, they do not do any work.
People are people, they are not afraid of even God. ,

 

All have become selfish leaders by falling in greed.
In today’s era, honesty is not visible to many. ,

 

If you ask for any help, then show your thumb.
When it’s your turn, apply butter. ,

 

Sometimes help even if you want to get fame.
Take photographs, to get the paper printed. ,

 

If the poor narrates his grief, he is not heard.
This is the age of Kali. Here, no one’s destiny is visible. ,

 

जरा देखके चल jara dekh ke chal

 

 

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