.

एक अच्छे सोच का दर्पण… ek achchhe soch ka darpan…

©डीआर महतो “मनु” 

परिचय- रांची, झारखंड


 

      भारत देश एक पवित्र देश है। यहां की परिवेश, समाज और संस्कृति अन्य देशों से कुछ भिन्न है। विभिन्न जाति और धर्मों के समावेश के बावजूद भी कई मायनों में अद्भुत समानता की विचार धाराएं सदैव बहते आ रही हैं। समानता की इस विचार धाराओं को हम कई तराजूओं से तौल सकते हैं और उनकी वजन अन्य देशों की फूहड़ मानसिकता वाली एक तुलनात्मक सभ्य संस्कृति से भारी अवश्य मिलेगा। वैसे तो आज के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा सक्रिय मीडिया, चैनलों की वजह से देश के बुद्धिजीवी लोग साहित्यिक करके अपना अस्तित्व बचा पा रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ एक वर्ग ऐसा भी है जो पढ़े-लिखे होकर भी, खासकर युवा वर्ग (लड़के लड़कियां) अपने सभ्य समाज को दरकिनार कर खुद की ईज्जत और मानवीय  अस्तित्व को भूलने लगे हैं। उन्हे जरा भी एहसास नहीं अपने परिवार, समाज और इस प्रगतिशील देश के नैतिक हक के बारे में। ये हक किसके लिए? देश में रह रहे नागरिकों की व्यक्तित्व की विकास, समाज और संपूर्ण राष्ट्र की विकास के लिए ही तो है।

 

उसी संदर्भ में हम समाज के उन युवा वर्गों की बात करना चाहेंगे जिन्हें भौतिक दर्पण से लेकर एक सशक्त और अच्छे सोच वाले दर्पण की कितनी जरूरत है। मानते हैं आज के युग और आज के हालात में पैसे की अहमीयता मानवीयता से भी बढ़कर दिखने लगी है। लोगों में आधुनिकता की लहर नस -नस में बहने लगा है। आजकल के इस चमक-धमक वाली जीवन, खासकर युवा वर्ग पर बेहिसाब हावी होने लगा है। ऐसा लगने लगा है मानो लोगों में धैर्यता ही खत्म हो गया हो। अर्थात; वाकई में सोच की गति तो तीब्र हुई है लेकिन दिशाविहीन भी दिख रही है। वास्तव में हर क्षेत्र में प्रगति हो रही है लेकिन उससे निकले कुछ दुष्परिणाम भी उतने ही तेजी से उस गति को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। एहसासें जरूर हैं लोगों में लेकिन इग्नोर करके विलाषिता को अपने ऊपर हावी करते जा रहे हैं। मालूम हो कि यही विलाषिता की बस्तुएं अर्थात बिलाषिता वाली सोच एक दिन हम सबके उपर भी हावी हो जाएगी और हमें बर्वादी के डगर में धकेल देगा।

 

जमाने के लोग भी उन कड़ी संघर्षों के बीच ऐसो आराम से जरूर रहते थे लेकिन दिखावे की चीजें उन पर इतना हावी नहीं थीं। उन चीजों में प्यार की एक अलग ही खुशबु बहती थी मगर आज के युग में वो एहसास क्षणिक रह गया है। किसी को किसी से बहुत ज्यादा मतलब रह नहीं गया और कारण सिर्फ और सिर्फ स्वार्थपरता और कुंठित मानसिकता दिखाई पड़ रही है। अपने सोच को इस प्रकार ढाल रहे हैं जैसे कि आज की विलाषिता को पाकर हमें कल ही पंच तत्व में विलीन हो जाना है। भविष्य अब हमारे खाते में बची ही नहीं। हाँ उम्मीदें तो बहुत हैं अपने उन क्षणिक सुखों की भविष्य की लेकिन उनके दुष्परिणामों की तनिक भी एहसास नहीं है।

 

बात करते हैं एक अच्छे सोच वाली दर्पण की। आज समाज कई तरह के जीवन शैली के सोच के वर्गों में बंट चुका है। हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं आज के कुछ युवा वर्ग के बारे में जो देश के भावी कर्णधार हैं। क्या वे यही चाहते हैं, अन्य देशों की तरह ही हमारा सभ्य संस्कृति वाला देश भी एक फूहड़ देश बने! कुछ लोग पैसे की लालच में सार्वजनिक तौर पर खुलेयाम अपने जिस्म की नुमाईश देकर अपने ईज्जत की तार-तार कर रहे हैं। उनको एहसास नहीं कि आज मैं अपना जिस्म दिखाकर, लोगों को भ्रमित कर उनकी दिशा भटकाने में कामयाब हूं और मेरे जेब भर रहे हैं, लेकिन साथ ही ये भी याद रखना चाहिए कि कल को मेरे औलाद भी मेरी नकल करेंगे और कहीं ना कहीं मेरी फूहड़पना की हद पार करके मुझे भी जीत जायेंगे। वक्त बीतेगा, उम्र ढलेगा तब एहसास होगा कि मैंने जो भी तरीका अपनाया वो सरासर अनैतिक और असभ्य था। अर्थात हमारी सोच एकदम भिन्न और घटिया था।

 

आग्रह होगा इस सभ्य देश का और एक जिम्मेदार सभ्य समाज का कि अपना सोच को नैतिक और उचित दिशा दें जिसे अपने साथ-साथ अपने परिवार, समाज और देश की ईज्जत बनी रहे। देशवाशियों का कल्याण हो सके। हम सब अपने राष्ट्र को सदैव एक मजबूत राष्ट्र के रूप में देख सकें। अंग प्रदर्शन को फैशन ना बनाएं तथा लोगों को दिग्भ्रमित ना करें। याद रहे आपके किए का जो परिणाम आयेगा उसमें आप भी बच नहीं पाएंगे। अपने कर्मों से सदैव ही देश को एक अच्छा संदेश दें और देश रक्षा और देश के प्रगति की सहयोग में सदैव हाथ बटाएं उसी में अपने राष्ट्र का भलाई है। (अर्जी है इस लेख को सकारात्मकता के साथ प्यार दें!)

 

 

डीआर महतो
©DR Mahto Manu
India is a holy country. The environment, society and culture here is somewhat different from other countries. Despite the inclusion of different castes and religions, there have always been ideas of wonderful equality in many ways. We can weigh these ideas of equality with many scales and their weight will be heavier than a comparative civilized culture of other countries with a sloppy mentality. Although due to today’s modern electronic devices and active media, channels, the intellectuals of the country are able to save their existence by doing literature, but on the other hand there is a section who, even after being educated, especially the youth (boys and girls) have their own By bypassing the civilized society, they have started forgetting their dignity and human existence. They do not have any idea about the moral rights of their family, society and this progressive country. For whom is this right? The development of the personality of the citizens living in the country is only for the development of the society and the entire nation.
 
In the same context, we would like to talk about those young sections of the society who need a strong and good thinking mirror from a physical mirror. It is believed that in today’s era and in today’s situation, the importance of money has started showing more than humanity. The wave of modernity has started flowing in the veins of the people. In today’s lucrative life, especially the youth has started dominating unaccountably. It seems as if people have run out of patience. meaning; In fact, the speed of thinking has accelerated but it also seems to be directionless. In fact, progress is being made in every field, but some of the ill effects emanating from it are equally trying to weaken that momentum. Feelings are definitely there in people, but by ignoring them, they are dominating the luxury. It is to be known that the same things of wickedness, that is, the thinking of wickedness, will one day dominate all of us and will push us into the path of barbarism.
The people of the era also lived so comfortably in the midst of those hard struggles, but the things of appearance were not so dominant on them. A different fragrance of love used to flow in those things, but in today’s era that feeling has remained momentary. No one has much meaning to anyone and the reason is showing only selfishness and frustrated mentality. We are molding our thinking in such a way that after attaining today’s luxury, we have to merge into the five elements tomorrow itself. The future is no longer in our account. Yes, there are many hopes for the future of those momentary pleasures, but there is not even the slightest feeling of their ill-effects.
 Let’s talk about a good thinking mirror. Today the society is divided into different classes of thinking of different lifestyles. We are compelled to think about some of the youth of today who are the future leaders of the country. Is this what they want, like other countries, our cultured country should also become a stupid country! Some people are tarnishing their honor by showing their bodies openly in public in the greed of money. They do not realize that today by showing my body, I have been able to mislead people and divert their direction and are filling my pockets, but at the same time it should also be remembered that tomorrow my children will also copy me and somewhere my sloppiness By crossing that limit, I too will win. Time will pass, age will pass, then I will realize that whatever method I adopted was completely immoral and uncivilized. Of course, our thinking was completely different and lousy.
There will be an urge of this civilized country and a responsible civilized society to give moral and proper direction to its thinking, which should maintain the respect of its family, society and country along with itself. May the welfare of the countrymen. May all of us always see our nation as a strong nation. Don’t make body show fashion and don’t mislead people. Remember that you too will not be able to escape the result of your actions. Always give a good message to the country with your actions and always extend your hand in the cooperation of the country’s defense and progress of the country, in that is the good of your nation. (Please love this article with positivity!)

 

हिफाजतगार वतन को खाने वालें हैं  hiphaajatagaar vatan ko khaane vaalen hain

 

 

 

 

 

 

Related Articles

Back to top button