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जावेदाँ | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

©बिजल जगड

परिचय- मुंबई, घाटकोपर


 

 

विरान है गुलशन भलाकिधर चले,

उठा के दामन भला किधर चले।

 

बे -कसी में बैठे है पत्थर बनके,

दिल ए नाकाम भला किधर चले।

 

खोई खोई जिंदगी आँखो में अश्क,

तार तार हुए है भला किधर चले।

 

दिल पर हजार औहाम छाए हुए,

इश्क जावेदाँ है भला किधर चले।

 

दामन ए सुबह पर फैले रंगीन फूल,

रौनक हर जगह भला किधर चले।

 

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