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सहमा-सहमा आज sahama-sahama aaj

©डॉ. सत्यवान सौरभ

परिचय– हिसार, हरियाणा.


 

कौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार ।

कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।।

 

परिवर्तन के दौर की, ये कैसी रफ़्तार ।

गैरों को सिर पर रखें, अपने लगते भार ।।

 

अंधे साक्षी हैं बनें, गूंगे करें बयान ।

बहरे थामे न्याय की, ‘सौरभ’ आज कमान ।।

 

कौवे में पूर्वज दिखे, पत्थर में भगवान ।

इंसानो में क्यों यहाँ, दिखे नहीं इंसान ।।

 

जब से पैसा हो गया, संबंधों की माप ।

मन दर्जी करने लगा, बस खाली आलाप ।।

 

दहेज़ आहुति हो गया, रस्में सब व्यापार ।

धू-धू कर अब जल रहे, शादी के संस्कार ।।

 

हारे इज़्ज़त आबरू, भीरु बुजदिल लोग ।

खोकर अपनी सभ्यता, प्रश्नचिन्ह पे लोग ।।

 

अच्छे दिन आये नहीं, सहमा-सहमा आज ।

‘सौरभ’ हुए पेट्रोल से, महंगे आलू-प्याज ।।

 

गली-गली में मौत है, सड़क-सड़क बेहाल ।

डर-डर के हम जी रहे, देख देश का हाल ।।

 

लूट-खून दंगे कहीं, चोरी भ्रष्टाचार ।

ख़बरें ऐसी ला रहा, रोज सुबह अखबार ।।

 

सास ससुर सेवा करे, बहुएं करती राज ।

बेटी सँग दामाद के, बसी मायके आज ।।

 

(सत्यवान सौरभ के चर्चित दोहा संग्रह तितली है खामोश से )

 

 

डॉ. सत्यवान सौरभ

Dr Satywan Saurabh

 

 

shock today

 

 

 

Who asks for merit, the trick is the basis.
The crows are picking pearls, laughing in vain.

 

What is the pace of change?
Keep the cows on your head, your weight.

 

Be a blind witness, make a dumb statement.
Deaf hold of justice, ‘Saurabh’ is in command today.

तुम्हें तो हम से प्यार है | ऑनलाइन बुलेटिन
READ

 

Ancestors are seen in the crow, God in the stone.
Why here in humans, humans are not seen.

 

Since the money is gone, the measure of relationships.
Mind started tailoring, just empty space.

 

Dowry is sacrificed, rituals are all business.
The rites of marriage are burning now.

 

Loss of respect, brave people.
Losing their civilization, people on question mark.

 

Achhe din has not come, sadly today.
From ‘Saurabh’ petrol, expensive potatoes and onions ..

 

There is death in the street, the road is in bad shape.
We are living in fear and fear, see the condition of the country.

 

Loot-blood riots somewhere, theft corruption.
Bringing the news like this, the newspaper every morning.

 

Mother-in-law should serve, daughters-in-law rule.
Daughter-in-law with son-in-law, settled maiden today.

 

(from Satyavan Saurabh’s famous collection of couplets, Titli is silent)

 

 

 

26 साल पहले किए गए जुर्म पर राज बब्बर को 2 साल की कैद 26 saal pahale kie gae jurm par raaj babbar ko 2 saal kee kaid

 

 

 

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