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जनता तेरी चौखट पे janata teree chaukhat pe

©अविनाश पाटले

परिचय– मुंगेली, छत्तीसगढ़


 

 

जनता तेरी चौखट पे,

खड़े है अपने माथे टेक।

सत्ताधारी होकर भी,

क्यों नहीं करते काम नेक ।।

तुम्हारे रहते हुए हमें,

कहीं जाना नहीं पड़ते।

किसी के सामने हाथ जोड़कर,

गिड़गिड़ाना नहीं पड़ते।

करें क्या ?

कहाँ जाये ? हम जनता

होता नहीं है ठीक से काम,

दिन ढल जाता है बैठे बैठे

सुबह से लेकर शाम।

न सुनते अधिकारी कर्मचारी

खुद पे रहते वो मसरूफ़

दफ्तर आते हैं वो लेट

न साहब से होते हैं भेंट

जनता तेरी चौखट पे,

खड़े है अपने माथे टेक।

दर-दर भटकते हैं हम,

काम करने कराने का

तुझमें नहीं है दम।

ये कैसी राजनीति

तेरी कैसी सरकार,

लीला तेरी है अपरम्पार।

नीयत नहीं है तेरे विवेक

जनता तेरी चौखट पे,

खड़े है अपने माथे टेक।

मीठी बातें और कहाँ है वादे,

जीतते तक तू

अपने काम साधे।

इक दूजे में मतभेद पैदाकर

राज सिंहासन हथियाया है,

जब जब हम जनता

गोहर लगाये

तब तब हमें लतियाया है।

शिक्षा, स्वारथ्य, बिजली, पानी,

जन सुविधाओं की बड़ी परेशानी।

ऊंची शान शौकत से भर रहे

हो तुम अपने पेट

जनता तेरी चौखट पे,

खड़े है अपने माथे टेक।

तू एक जिंदा लाश है,

न तुझ पे हमारे विश्वास है।

न गांव शहर विकास है,

शुरू से लेकर आज तक

ऐसे ही तेरे इतिहास है।

जनता के मन उदास है,

जनता के दर्द को

लिखा कवि अविनाश है।

तुम बैठे हो चुपचाप

जैसे बनके राजा सेठ

जनता तेरी चौखट पे,

खड़े है अपने माथे टेक।

 

 

Avinash Patle

 

गांधी जी | Onlinebulletin.in
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People at your doorstep

 

 

People on your doorstep,
Standing on your forehead.
Despite being in power,
Why don’t you do good work?
We live with you
You don’t have to go anywhere.
With folded hands in front of someone,
You don’t have to cry.
do what?
where to go we the public
does not work properly,
day passes by sitting
From morning till evening.
no listening officer
he lives on his own
they come to the office late
don’t meet sir
People on your doorstep,
Standing on your forehead.
We wander from door to door,
to work
You don’t have the guts.

what kind of politics is this
What kind of government do you have?
Leela is yours unparalleled.
No intention is your conscience
People on your doorstep,
Standing on your forehead.
Sweet things and where are the promises,
till you win
Do your work.
by creating differences in each other
has captured the throne,
whenever we know
put an eye on
Then then we have Latiya.
education, health, electricity, water,
Big problem of public facilities.

full of glory
yes you are on your stomach
People on your doorstep,
Standing on your forehead.
You are a living corpse
Neither do we have faith in you.
Neither village nor city development
from the beginning till today
Such is your history.
The public’s heart is sad,
to the pain of the people
The poet written is Avinash.
you are sitting quietly
as Raja Seth
People on your doorstep,
Standing on your forehead.

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मेहनत mehanat

 

 

 

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