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ख्वाब तो यही देखा है मैंने khvaab to yahee dekha hai mainne

©गुरुदीन वर्मा, जी.आज़ाद

परिचय– बारां(राजस्थान)


 

ख्वाब तो यही देखा है मैंने

कि अपनी जो दुनिया होगी जमीं पर,

होगी सबसे निराली जहान में वह,

सच में अटूट प्रेम और विश्वास की,

जिसमें होगी खुशियां ही खुशियां,

शांति और सुकून अपनी दुनिया में,

ख्वाब तो यही देखा है मैंने।

 

गर कभी हो जाये हम नाराज,

मना लेंगे एक दूसरे को हम,

चाहे कितनी भी हो लड़ाई,

हम दोनों के बीच में लेकिन,

नहीं होगा कोई तीसरा तब,

ख्वाब तो यही देखा है मैंने।

 

अगर कोई होगा तीसरा भी,

तो वह होगा हमारा चिराग,

सिर्फ वही फूल होगा हमारे बीच,

जिसके देखते हैं हम सपनें,

जिसको सींच रहे हैं हम,

अपने प्यार और अरमान से,

ख्वाब तो यही देखा है मैंने।

 

वह होगा अपनी प्रसिद्धि का कारण,

नहीं होगा वह संस्कारहीन- असभ्य,

या तो होगा वह यशोदा के कान्हा सा,

या फिर होगा वह दशरथ के राम सा,

आज्ञाकारी श्रवण पुत्र की तरह वह,

ख्वाब तो यही देखा है मैंने।

 

 

 

गुरुदीन वर्मा

Gurudina Varma 

 

I have dreamed this

 

 

 

I have dreamed this

that the world which will be on the ground,

She will be in the strangest world,

Truly unwavering love and faith,

In which there will be happiness only happiness,

Peace and peace in your world,

This is what I have dreamed of.

 

If we ever get angry,

We will convince each other,

no matter how much fight,

between us but,

There will be no third then,

This is what I have dreamed of.

 

If there is any third also,

So that will be our lamp,

Only that flower will be between us,

Whose dreams we see,

whom we are watering,

With your love and desire,

This is what I have dreamed of.

 

That would be the reason for his fame,

He will not be cultureless- uncivilized,

Either he will be like Yashoda’s ear,

Or will he be like Dasaratha’s Rama,

Like the obedient Shravan son,

This is what I have dreamed of.

 

 

 

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