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नोएडा का वो टॉवर ! noeda ka vo tovar !

©रामकेश एम यादव

परिचय- मुंबई, महाराष्ट्र.


 

( नज़्म )

 

भ्रष्टाचार की चादर जो ओढ़ा था टॉवर,

नौ सेकण्ड में धराशायी हुआ टॉवर।

कितने परिन्दे वहाँ बनाते आशियाना,

बहार से पहले जमींदोज हुआ टॉवर।

 

तबाह हो गए कितने बेचारे फ्लैटवाले,

ख्वाब उनका अंदर से रुलाया टॉवर।

तल्ख हकीकत कब समझे हैं बिल्डर,

गर्दिश के अब्र वही बुलाता टॉवर।

 

एक-एक पाई लोग जोड़ते हैं कैसे,

जी-तोड़ कमाई को रौंदते हैं टॉवर।

लालफीताशाही की लालच के ऊपर,

ऊँची अट्टालिकाओं में ढलते हैं टॉवर।

 

भ्रष्टाचार की जुल्फें होती हैं पेंचदार,

चाँद-सितारों से बात करते हैं टॉवर।

आसमां सोता है देखो इनकी बाँहों में,

गरीबों के आँसू कहाँ पोंछते हैं टॉवर।

 

वो भी दिन जल्द आएगा मुल्क में,

कोई भी अवैध न बना पाएगा टॉवर।

कानून के हाथ होते हैं बहुत बड़े,

बारूद से न उड़ाया जाएगा टॉवर।

 

 

रामकेश एम यादव

Ramkesh M Yadav

 


 

That tower of Noida!

 

 

( verse )

The tower that was covered with corruption,
The tower collapsed in nine seconds.
How many birds make their homes there,
Grounded tower before spring.

How many poor flats were destroyed,
His dream tower made him cry from inside.
When have the builders understood the harsh reality,
The tower of Gardish calls itself the same.

How do people add one by one pie,
Towers trample on hard earned money.
Over the greed of red tape,
Towers fall in high lofts.

 

The knots of corruption are screwed,
The tower talks to the moon and the stars.
The sky sleeps, look in their arms,
Where do you wipe the tears of the poor?

कब कैसे अब कहां मिले | ऑनलाइन बुलेटिन
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That day will also come soon in the country,
No one will be able to build an illegal tower.
The hands of the law are very big,
The tower will not be blown up with gunpowder.

 

 

श्रीगणेशोत्सव shreeganeshotsav

 

 

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