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मुफलिस लोग अक्सर बहुत ही खुद्दार होते हैं | ऑनलाइन बुलेटिन

©भरत मल्होत्रा

परिचय- मुंबई, महाराष्ट्र


 

कभी हम फूल होते हैं, कभी हम खार होते हैं

कभी लाठी बुढ़ापे की, कभी तलवार होते हैं

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आईने की तरह सच बोलते हैं हम हमेशा ही

जो जैसे देखता है वैसे ही दीदार होते हैं

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कभी ना तोलना पैसे से तुम इनकी गरीबी को

मुफलिस लोग अक्सर बहुत ही खुद्दार होते हैं

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पाएगा तू क्या आखिर जा के उनकी महफिल में

वहां भी कौन से ए दिल तेरे गमख्वार होते हैं

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जोश के साथ लाज़िम है होश कायम रहे अपना

भटक जाते हैं अक्सर जो तेज रफ्तार होते हैं

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ना उम्मीद रखना दोस्ती की हर किसी से तुम

मुकद्दर जानिए अच्छा अगर दो-चार होते हैं

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