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सफरनामा sapharanaama

©आशी प्रतिभा

परिचय– ग्वालियर मध्यप्रदेश.


 

 

नमस्कार मित्रों मैं आशी प्रतिभा आप सभी के समक्ष प्रस्तुत हूं। आशा करती हूं आप सभी के जो मेरे पास मैसेज आ रहे थे। आज मेरी सोच मेरी कलम के साथ में आप सभी के साथ अपने विचार सांझा कर रही हूं।

 

कई बार मुझसे लोग पूछते हैं, आप कहां रहते हो, आप क्या करते हो और आपने लिखना कैसे शुरू किया। कई सारी बातें पूछते हैं, जिनके जवाब में घंटों फोन पर बात करके नहीं दे पाती। इसलिए सोचा कि आप सभी के लिए अपना सूक्ष्म परिचय देकर आप सभी को अवगत कराऊं।

 

मैं मध्य प्रदेश जिला ग्वालियर की रहने वाली हूं। मेरा जन्म ग्वालियर की गालव भूमि पर हुआ है; और अभी शादी के बाद भी मैं ग्वालियर में ही निवास कर रही हूं। जहां मैं मेरे पति बच्चे सभी साथ रहते हैं।

 

अक्सर लोगों से सवाल पूछते हैं प्रतिभा जी आप बहुत अच्छा लिखते हो आपने कैसे लिखना शुरू किया।

 

तो मैं आप सब को बताना चाहूंगी कि जो लिखने का शौक है, वह मुझे बचपन से ही था। अक्सर मैं मेरे पिताजी को अपने छोटी-छोटी कविताएं लिखकर बताया करती थी और वे उन्हें हिंदी मात्राओं की त्रुटियों का अवलोकन किया करते थे। वह बहुत खुश हुआ करते थे। मेरे छोटी- छोटी कविता और गीत पर।

 

बस जिंदगी अच्छी चल रही थी परंतु यह लिखने की कलात्मकता और इस प्रतिभा का भान मुझे कोरोना जैसी गंभीर महामारी जिसको विश्व जनित महामारी घोषित कर दिया गया तब हुआ। क्योंकि मुझे टीवी देखने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और समाचार मैं अपने पति के साथ एक घंटा देखती थी।

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सारा दिन वही घर का काम, स्पेशल फरमाइश, अभी उठी थी परंतु कहीं आने- जाने का समय अब ना था। मानो ऐसा लगने लगा था यदि बाहर निकलेंगे तो जिंदगी समाप्त हो जाएगी और घर में रहकर घुटन बहुत हो रही थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं समाज के कार्यों में थोड़ी रुचि रखने के कारण मैं अलग-अलग संस्थाओं से जुड़ी जिसके अंतर्गत मैंने कई प्रतिस्पर्धा में भाग लिया और विजय प्राप्ति की इसके बाद मुझे मेरे अंदर छुपी एक और प्रतिभा नजर आई जो कि अपने विचार व्यक्त कर सकती थी।

 

मैंने नन्ही- नन्ही कविताओं के रूप में अपने विचारों को व्यक्त करना शुरू किया जो आज लेख आलेख बन कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। और आज जब आप सभी देश- विदेश में भारत से मुझे मोटिवेशनल भरे जो मैसेज आते हैं कि आशीष जी आपको अच्छा लिख रही है और मनोकामना है कि आप ऐसे ही लिखते रहेंगे तो यह देखकर मेरा मन बहुत ही खुशी से भर उठता है और सोचती हूं कि यह सफर जारी रखने के लिए अपने जो भी लोकप्रियता मैंने कमाई है उसे बनाए रखने के लिए मुझे समाज के लिए कुछ ना कुछ अच्छे विचार समय-समय पर लेकर आते रहना आवश्यक है।

 

इसके लिए ही मैं आप सभी की आभारी हूं जो आप सभी के कार्यों से मुझे प्रेरणा मिलती है और मैं उसको अपनी लेखनी के द्वारा लिख पाती हूं।

 

सफर जारी है…………….

धन्यवाद आशी प्रतिभासफरनामा ………….

 

 

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आशी प्रतिभा

Ashi Pratibha

 

 

A Career

 

 

Hello friends, I am presenting Aashi Pratibha in front of all of you. I hope all of you who were getting messages to me. Today I am sharing my thoughts with all of you with my pen.

 

Many times people ask me, where do you live, what do you do and how did you start writing. They ask many things, to which they are unable to answer by talking on the phone for hours. So thought that by giving my subtle introduction to all of you, let me make you aware.

 

I am a resident of Madhya Pradesh district Gwalior. I was born on the Galav land of Gwalior; And now even after marriage, I am residing in Gwalior only. Where I, my husband and children all live together.

 

Often people ask questions Pratibha ji, you write very well, how did you start writing.

 

So I would like to tell all of you that I had a passion for writing since childhood. Often I used to write my short poems to my father and he used to observe him for errors in Hindi quantities. He used to be very happy. On my short poems and songs.

 

Just life was going well but the artistry of writing this and this talent came to me only after a serious epidemic like Corona, which was declared a world-born epidemic. Because I was not interested in watching TV and used to watch news for an hour with my husband.

 

The whole day the same household work, special request, had just arose, but now there was no time to go anywhere. It was as if it seemed that if we would go out, then life would end and there was a lot of suffocation in the house. I could not understand what to do, due to a little interest in the work of the society, I joined different organizations, under which I participated in many competitions and after winning, I saw another talent hidden inside me. who could express her views.

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I started expressing my thoughts in the form of small poems, which are presented in front of all of you today by becoming an article. And today, when all of you get motivational messages coming from India and abroad that Ashish ji is writing you well and I wish that you keep writing like this, then seeing this fills my heart with great joy and I think. That in order to maintain the popularity that I have earned to continue this journey, it is necessary for me to keep bringing some good ideas for the society from time to time.

 

For this I am grateful to all of you who inspire me from all of your works and I am able to write it through my writing.

 

Journey continues…………….

 

 

 

 

शिक्षक संघ प्रगतिशील का सदस्यता अभियान के लिए ब्लॉक वार कमेटियां गठित shikshak sangh pragatisheel ka sadasyata abhiyaan ke lie blok vaar kametiyaan gathit

 

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