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शिक्षक shikshak

©उषा श्रीवास, वत्स

परिचय– बिलासपुर, छत्तीसगढ़.


 

 

सदाबहार फूल सा खिलकर

शिक्षक खुद महकता और महकाता,

कभी माता पिता बनकर दी सलाह

ढ़ाल बनकर हर मुश्किल से बचाता।

 

झटकती है दुनिया हाथ कभी जब

उज्जवल भविष्य का सूरज उगाता,

देकर अपने ज्ञान की पूंजी

कभी डांटकर प्यार जताता।

 

गुरु का साथ यूँ चलता है ता उम्र

दुनिया बदलने का गूढ़ सिखलाता,

कभी गलती से भी बुरा न सोचना

सही गलत का भेद हमें ये बतलाता।

 

याद आता है मुझे सफल होने पर

अपना अनोखा ज्ञान देता,

जब जब हम लय गति से भटके

दोस्त बनकर उलझन समझ लेता।

 

जीवन को करता रोशन गुरु

ज्ञान का दीपक वो जलाता,

इस देश और दुनिया के लिए

एक अच्छा सामाज बनाता।

 

 

 

उषा श्रीवास, वत्स

Usha Shriwas

 

 

Teacher

 

 

blooming like evergreen flower
The teacher himself smells and smells,
Ever given advice as a parent
By becoming a shield, he saves from every difficulty.

 

Whenever the world shakes hands
The sun of a bright future rises,
Giving your capital of knowledge
Sometimes showing love by scolding.

 

Guru’s side walks like this
Teaches the secret of changing the world,
never think bad
It tells us the difference between right and wrong.

 

remember me being successful
Giving his unique knowledge,
whenever we stray from the rhythm
By becoming a friend, he would understand the confusion.

 

guru illuminates life
He lights the lamp of knowledge,
for this country and the world
Makes a good society.

 

 

क्या कुछ लोग वामपंथी चरमपंथियों को बचाने के लिए कर रहे कोर्ट का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पूछा यह सवाल kya kuchh log vaamapanthee charamapanthiyon ko bachaane ke lie kar rahe kort ka istemaal, supreem kort ne kyon poochha yah savaal

 

असाढ़ के महिना आगे asaadh ke mahina aage
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