वास्तविकता में प्रेम को स्वीकार करने का क्या पैमाना है | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

©आकाश त्रिपाठी, अधिवक्ता

परिचय- दुर्ग, छत्तीसगढ़.


 

वास्तविक प्रेम शक्ति, जब मन में घुलती है, तो प्रेम मृदुल स्वभाव बन जाता है, और सच्चे प्रेम से किया कार्य विशुद्ध होता है ना कि किसी के विरूद्ध हो सकता है। और श्वेत, स्वच्छ, सच्चे प्रेम तुच्छ हो ही नहीं सकता, हो सकता है वो दिखाई ना दे। पर प्रामाणिकता में वो एक आभास हो सकता है, अगर वो आभास है तो वो तथ्य है।

 

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