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ये मच्छर भी? ye machchhar bhee?

©पद्म मुख पंडा

परिचय- सेवानिवृत्त अधिकारी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, रायगढ़, छत्तीसगढ़


 

 

न दिन देखते, न रात,

ये आवारा मच्छर,

करते हैं, आघात मुंह से,

जहरीले तरल पदार्थ,

मानव शरीर के अंदर,

डालकर, चंपत हो जाते हैं!

होती है खुजली,

होकर परेशान , आदमी लेता है संज्ञान,

मॉस्किटो क्वाइल जलाकर,

आश्वस्त हो जाता है,

मच्छर से बदला लेने का,

यह तरीका भी फीका पड़ चुका है,

मच्छर धुएं के साथ भी,

राग भैरवी गाते हैं,

पालने में सोए हुए बच्चे को भी,

चिकोटी काट जाते हैं!

बच्चा रोता है, मां को तकलीफ़ होती है,

बच्चे को लेकर,

मच्छर दानी के साथ सोती है।

मलेरिया डेंगू के ओ जन्म दाता,

तुमको बच्चों पर भी, तरस नहीं आता?

तुम्हारा अंत हम करके रहेंगे

बहुत हो चुका, अब न यह यातना सहेंगे!

 

 

 

पद्म मुख पंडा

Padma Mukh Panda


 

This mosquito too?

 

 

neither day nor night,
This stray mosquito
do, blow from the mouth,
toxic liquids,
inside the human body,
By pouring, get stunned!
there is itching,
Being upset, the man takes cognizance,
By lighting a mosquito coil,
is convinced,
to avenge the mosquito,
This method has also faded,
Even with mosquito smoke,
Raag Bhairavi sings,
Even the child sleeping in the cradle,
Twitch gets cut!
The child cries, the mother is in pain,

with the child,
The mosquito sleeps with the net.
O birth donor of malaria dengue,
You don’t feel pity for children too?
we will end you
Enough is enough, now I will not bear this torture!

 

सुरों का सरगम suron ka saragam

 

पहली झलक | ऑनलाइन बुलेटिन
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