कातिल नहीं बन सकते | ऑनलाइन बुलेटिन

©हरीश पांडल, विचार क्रांति

परिचय- बिलासपुर, छत्तीसगढ़


 

 

 

विचार क्रांति कभी

 मंद नहीं हो सकते

विरोधियों से कभी

अनुबंध नहीं हो सकते

लाख समस्याएं आ

 जाये राहो पर

आजादी हासिल करने

कोई प्रतिबंध

नहीं हो सकते ?

विचार क्रांति कभी

मंद नहीं हो सकते ।

सरफ़रोशी हमने

 सीखी है जिनसे

उनके संघर्ष, शहादतें

कभी बंद नहीं हो सकते

निकल पड़े हैं सर पर

कफन बांधकर

बढ़ गये है अपनी हदें

लांघकर

तख्तों- ताज पर तुम

करते हो राज

हमें तो अपने मूलनिवासी

महापुरुषों पर है नाज

राज सत्ता तो हम कल

हासिल कर सकते हैं

फर्क बस इतना है

हम बेगुनाहों के कातिल

नहीं बन सकते ….


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