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जवाबदेही | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

©नीरा परमार

परिचय- राँची, झारखंड.


 

जब

जब–

तुम्हारे

पॉलिश लगे

चमचमाते

जूते-चप्पल–

अपनी

कारोबारी

व्यस्त दुनिया का

चक्कर लगाते-लगाते

घिस

फटे -पुराने होकर

मेरी

राँपी का दरवाजा खटखटाते  हैं ;

सच जानो

मेरी

बेबस, कराहती

पीढ़ियों पर बरसाए गए

चमरौंधे,

जूते-चप्पलों की

ठोकरों का

तड़पता इतिहास,

दबी राख में

चिन्गारियाँ फेंकने लगता है!

तुम्हारे

जर्जर

जूते-चप्पल पर

पड़ी हुई

मेरी

एक-एक चोट

माँगती है

हिसाब

जवाब देना होगा

देना होगा

जवाब!!

 

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जहां महकाया जाए ! jahaan mahakaaya jae !
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