.

स्थापना दिवस-मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा | ऑनलाइन बुलेटिन

©द्रौपदी साहू (शिक्षिका), कोरबा, छत्तीसगढ़


 

 

पूर्वोत्तर के ‘seven sisters’ कहे जाने वाले 7 राज्यों में से 1972 में तीन राज्यों का गठन हुआ था। ये तीन राज्य हैं- त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर ! पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों की संस्कृति और परंपरा अपने आप में समृद्ध है। पूर्वोत्तर के इन तीनों राज्यों को पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के तहत 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। त्रिपुरा और मणिपुर की पूर्व रियासतों को वर्ष 1949 में भारत में मिलाया गया और 21 जनवरी 1972 तक पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने तक ये केंद्र शासित प्रदेश के रूप मेें जाने जाते थे।

 

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को अलग राज्य बने 21 जनवरी 2022 को पूरे 50 साल हो गए हैं।

 

मेघालय का गठन असम के अंतर्गत 2 अप्रैल, 1970 को हुआ था। मेघालय असम राज्य के दो बड़े जिलों संयुक्त खासी हिल्स एवं जयन्तिया हिल्स को असम से अलग 21 जनवरी, 1972 को किया गया था। इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने से पूर्व 1970 में अर्ध-स्वायत्त दर्जा दिया गया था। 1971 में संसद ने पूर्वोत्तर पुनर्गठन अधिनियम पास किया जिसके अन्तर्गत्त मेघालय को 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और अपनी स्वयं की मेघालय विधान सभा बनी।

 

मेघालय को विभिन्न कला तथा शिल्प के लिए जाना जाता है। यहाँ बेंत और बाँस का प्रमुख स्थान है। गारो हिल्स में वस्त्रों की कलात्मक बुनाई तथा लकड़ी पर नक्काशी का काम किया जाता है। एंडी रेशम की रेशम बुनाई बहुत प्रसिद्ध है। कालीन की बुनाई, आभूषण, संगीत वाद्य यंत्र यहाँ की अन्य विशेषताएँ हैं। परंतु इस राज्य का अद्वितीय शिल्प है अनानास रेशे की वस्तुएँ जिनमें इसकी पत्तियों से रेशे का प्रयोग विभिन्न प्रकार के नेट, बैग तथा पर्स बनाने के लिए किया जाता है। मेघालय नृत्य तथा संगीत के क्षेत्र में सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। यहाँ किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के नृत्य हैं – नाहकजोत, मस्तिएह, शाद वैट, शादयंती आदि। मेघालय को ‘मिनी स्कॉटलैंड’ और ‘बादलों का घर’ कहा जाता है।

अप्रतिम सूर्योदय | newsforum
READ

 

दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश मेघालय के मासिनराम और चेरापूँजी में होती है । मेघालय की राजधानी शिलांग है।

 

मणिपुर ने जनजातीय परंपराओं तथा वैष्णव मत के अपने विशिष्ट मिश्रण के साथ भारतीय संस्कृति की समृद्धि तथा विविधता में योगदान दिया है। मणिपुर के विभिन्न रंगीन शिल्पों में से उनके वस्त्रों, मजबूत काँसे की कटोरियों, बेंत और बाँस और स्पंजी ईख की बनी चटाइयों का विशेष उल्लेख मिलता है। मणिपुर अपने सोने और सोना चढ़े हुए आभूषण – कानों की बालियों, हार, बाजूबंद और कंगनों के लिए भी प्रसिद्ध है। मणिपुर में तिनकों तथा मिट्टी की सुंदर गुड्डियाँ और खिलौने भी बनाए जाते हैं। मणिपुर की राजधानी इंफाल है। मणिपुर को ‘Jewel Of India’ भी कहा जाता है ।

 

त्रिपुरा में जनजातीय लोगों की विशाल जनसंख्या है, इसलिए यहाँ विभिन्न प्रकार के शिल्प की परंपरा है। हथकरघा इस राज्य का सबसे महत्वपूर्ण शिल्प है। त्रिपुरा हथकरघा की प्रमुख विशेषता है विभिन्न रंगों में फैली हुई कढ़ाई के साथ ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज पट्टियाँ। इसके बाद बेंत तथा बाँस शिल्प आता है। लोकप्रिय हथकरघा वस्तुएँ हैं बाँस के स्क्रीन, लैंप स्टेंड, टेबल मैट, शीतलपट्टी, लकड़ी की नक्काशी, चाँदी के आभूषण और यहाँ प्रयोग किए जाने वाले अन्य शिल्प।

 

क्षेत्रफल के हिसाब से  त्रिपुरा देश का  तीसरा सबसे छोटा राज्य है।अगरतला त्रिपुरा की राजधानी है। त्रिपुरा का आधे से अधिक भाग जंगलों से घिरा है, जो प्रकृति-प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करता है।

Related Articles

Back to top button