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हंगामा hangaama

©राजेश श्रीवास्तव राज

परिचय– गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश.


विधाता छंद

 

सड़क से संसद तक, मचा रखा है कौन हंगामा।

कहीं मज़हब कहीं जाति, व डराया रोज़ जाता है।।

 

बड़ा लाचार है इंसा, बड़ा मजबूर है इंसा।

जहां देखो वहीं फैला, विकट यह रोज़ हंगामा।।

 

सभी सामान की कीमत, हुई तो आज भारी है।

न कोई रोजगारी है, कहीं देखो न कोई मुनाफा है।।

 

तलाक, कृषि, सीसीए बना कानून यहां पर है।

हर तरफ आज फैला कर, रखा है कौन हंगामा।।

 

किसी की लूट गई अस्मत, कहीं दानव दहेज चढ़ी।

लड़कियां आज भय में हैं, समय का चक्र ना बदला।।

 

सदन कैसे चलेगा जब, मचाते रोज हंगामा।

मनाते हैं बहुत उनको, जहां मतलब खड़ा ही हो।।

 

कहीं मशहूर होता ही, दिखाई दे रहा इंसा।

कर रहा आज हल्ला जो, वही नेता बना फिरता।।

 

कहीं रैली व धरने हैं, कहीं सड़कें रुक गई हैं।

जहां जब ठीक लगता है, वहीं हो रोज हंगामा।।

 

 

 

राजेश श्रीवास्तव

Ruckus

 

 

creator verse

 

 

From road to Parliament, who is creating a ruckus?
Somewhere religion goes somewhere caste, and gets scared everyday.

Insa is very helpless, Insa is very helpless.
Wherever you look, it spread there, this daily commotion.

The cost of all the goods, if so, is heavy today.
There is no employment, there is no look anywhere and there is no profit.

 

The law on divorce, agriculture, CCA is here.
By spreading everywhere today, who has kept the ruckus.

Somebody was robbed of pride, somewhere demon dowry climbed.
Girls are in fear today, the cycle of time does not change.

How will the house run when there is a ruckus everyday.
Many people celebrate them where their meaning is standing.

As soon as he became famous somewhere, Insa is visible.
Whoever is making an attack today, he would have become a leader.

Somewhere there are rallies and dharnas, somewhere the roads have stopped.
Wherever it feels right, there is a ruckus everyday.

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