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कर्म की रेखा ! karm kee rekha !

©रामकेश एम यादव

परिचय– मुंबई, महाराष्ट्र.


 

 

दिल जल चुका है, घर मत जलाइए,

जिन्दगी को मत तमाशा बनाइये।

मुसीबतें आती-जाती हैं जीवन में,

बुझे चराग को फिर से जलाइए।

 

कौन खुश है और कौन है खफा,

बस ख्वाहिशों की मशाल जलाइये।

आदमी है पानी का एक बुलबुला,

खुद अपने घाव पे मरहम लगाइए।

 

हाथ की लकीरें भले लाख उलझीं,

कर्म की रेखाओं से बदल डालिए।

चुप बैठा तो काट खाएगी तन्हाई,

मन के फूल को खुशबू पहनाइए।

 

कोई नहीं दिखाता अंदर के दर्द को,

मिले जो न सूरज, जुगुनू ही पालिए।

रुह की गहराइयों में ऐसे न झाँको,

परछाई अपनी गर्दिश की मिटा डालिए।

 

सुुबह होते ही बिखरने लगते हैं सितारे,

साहिल पे जाने से पहले पांव भिगोइए।

किसी की मेहरबानी पे न काटो जिन्दगी,

साँसों को न गिरवी पे कभी चढ़ाइए।

 

 

रामकेश एम यादव

Ramkesh M Yadav

 

 

Karma Line!

 

 

Heart is burnt, do not burn the house,
Don’t make life a spectacle.
Troubles come and go in life,
Light the extinguished lamp again.

 

Who is happy and who is angry
Just light the torch of desire.
Man is a bubble of water,
Apply ointment on your own wound.

 

Even though the lines of the hand got tangled up a million,
Replace with the lines of karma.
If you sit in silence, it will bite you.
Give fragrance to the flower of the mind.

 

No one shows the pain inside,
If you don’t get the sun, keep only the firefly.
Do not look into the depths of the soul like this,
Cast off your shadow.

बेच रहा ईमान को | newsforum
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Stars start falling apart in the morning,
Soak your feet before going to Sahil.
Do not cut life on someone’s mercy,
Never mortgage your breath.

 

 

हो गए लड़कर भी एक हम ho gae ladakar bhee ek ham

 

 

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