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विवेकानंद vivekaanand

©राजेश श्रीवास्तव राज

परिचय– गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश.


 

 

विधाता छंद पर आधारित रचना

 

न उनसे ही कभी पहले,

यहां अब कौन आया था।

विवेका का नाम था जिनका,

सदा इतिहास गाएगा।।

 

सदा चैतन्य रहा करता,

नरेंद्र नाम था जिनका।

युवा था तेज वैभव का,

प्रखर बुद्धि सदा उसकी।।

 

दिखाया जगत को उसने,

बताया सत्य सदा उसने।

हुआ धर्म का जब सम्मेलन,

शिकागो को हिला डाला।।

 

गुरु का शिष्य निराला था,

सदा भगवा पहनता था।

सनातन धर्म पर चलना,

यही संदेश दे डाला।।

 

हमें है गर्व सदा उन पर,

युवा के पथ प्रणेता थे।

नमन करता सदा उनको,

जहां भी बात उनकी हो।।

 

बड़ा था तेज माथे पर,

चमकता और दमकता था।

हमारे राष्ट्र के नायक,

बने प्रेरक सदा लायक।।

 

 

 

राजेश श्रीवास्तव

Rajesh Srivastava Raj

 

 

Vivekananda

 

 

 

Creation

 

never before them,
Who came here now?
Whose name was Viveka,
History will always sing.

 

always conscious,
Whose name was Narendra.
The youth was of bright splendor,
Always his sharp intellect.

 

He showed the world,
He always told the truth.
When the conference of religion took place,
shook Chicago.

 

Guru’s disciple was unique,
Always used to wear saffron.
Follow Sanatan Dharma
This is the message given.

 

We are always proud of them,
He was the pioneer of youth.
always salutes him,
Wherever they are.

 

Big was sharp on the forehead,
It was shining and shining.
Hero of our nation,
Be inspiring forever.

 

 

 

“जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी” : विवेकानंद “jitana bada sangharsh hoga, jeet utanee hee shaanadaar hogee” : vivekaanand

 

 

 

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