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ताज की मोहब्बत taaj kee mohabbat

©मजीदबेग मुगल “शहज़ाद

परिचय- वर्धा, महाराष्ट्र


 

मनकबत

 

ताजवाले का मुझ पे करम होगया ।

अजी दुनियां में अपना भरम होगया ।।

 

पूछने वालें पूछे तो कह देना अब ।

ताजवाला चाहत का धरम होगया ।।

 

कड़ी धूप में उसी चाहत का साया ।

सब से बड़ा मेरे लिए अजम होगया ।।

 

इबादत करता रहता हुं उस खुदा की ।

ताजवाले की चाह का जनम होगया ।।

 

मोहब्बत पे भला किस का चले जोर ।

ताजवाला अब हमारा सनम होगया।।

 

नागपूर का उजाला दरबारे ताज ।

हिन्दू मुस्लिम सभी का मरहम होगया ।।

 

‘शहज़ाद ‘ चाहने वालों को बुलाया।

ताजवाला ख़ानक़ाह हरम होगया ।।

 

 

 

मजीदबेग मुगल

Majidbeg Mughal


 

 

Taj Ki Mohabbat

 

 

Manqbat

The Tajwale’s blessings have fallen on me.
Hey, the world has got its fullness.

If those who ask, then tell them now.
The Tajwala’s desire has died down.

The shadow of the same desire in the scorching sun.
The greatest of all became ajam for me.

I keep on worshiping that God.
The wish of the Tajwale was born.

Whose emphasis on love?
The Tajwala is now our Sanam.

The Ujala Darbara Taj of Nagpur.
Hindu Muslim became the ointment of all.

Called the fans of ‘Shahzad’.
Tajwala Khanqah has become haram.

 

शहर से दूर shahar se door

 

 

 

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