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वरिष्ठ साहित्यकार रामकेश यादव शान-ए-हिन्द तथा परमवीर सम्मान से हुए सम्मानित varishth saahityakaar raamakesh yaadav shaan-e-hind tatha paramaveer sammaan se hue sammaanit

©रामकेश एम यादव

परिचय- मुंबई, महाराष्ट्र.


 

मुंबई | [महाराष्ट्र बुलेटिन] | मुंबई स्थित अपने साहित्य यात्रा में गाँव की मिट्टी, सादगी तथा मूल्यधर्मिता को नित्य नई पहचान देनेवाले वरिष्ठ साहित्यकार तथा रायल्टी प्राप्त कवि रामकेश एम.यादव का डॉ.अर्चना श्रेया, क्षमा पाण्डे, कृष्णा जोशी तथा पूर्व सैनिक अशोक कुमार जाखड़ की तरफ से शान-ए-हिन्द तथा परमवीर सम्मान से इन्हें अलंकृत किया गया है।

 

अगर प्रशस्ति पत्रों को छोड़कर देखें, तो अब तक इस कलमकार को २१० सम्मान पत्रों तथा पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इन्होंने गद्य और पद्य दोनों विधाओं में अपनी सृजनशीलता का परिचय दिया है। याद करो कुर्बानी, आओ स्कूल चलें, मजदूरन, महाराष्ट्र का आईना, सरहद आदि २५ पुस्तकें तथा 1700 से अधिक इनके लेख, पत्र लेख, कविता, कविता खण्ड, साक्षात्कार आदि देश के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं।

 

महाराष्ट्र पाठ्य पुस्तक निर्मिती विभाग, पुणे द्वारा इनकी दो रचनाएँ पाठ्यक्रम में शामिल की जा चुकी हैं। 1999 भारत -पाक जंग के दौरान इन्होंने भारतीय सैनिकों के हौसलाफजाई के लिए स्तम्भ लेख और वीर रस से ओतप्रोत कविताएँ लिखे।

 

मिट्टी की सुगंध (काव्य) तथा झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (काव्य) सहित आधा दर्जन पुस्तकें आनेवाले समय में इनकी प्रकाशित होनेवाली हैं। इनकी रचनाओं में गांव और शहर की जिन्दगी के संश्लिष्ट और सघन यर्थाथता की गहरी पहचान देखने को मिलती है। इनकी सरल और सहज लिखने की शैली पाठकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है।

 

ये उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जनपद के ब्लाक मार्टीनगंज स्थित तेजपुर गाँव के मूल निवासी हैं और १ मार्च, २०१९ को बृहन्नमुंबई महानगरपालिका के शिक्षण विभाग में शिक्षक पद से सेवानिवृत्त होकर सतत साहित्य साधना में लीन हैं। इनकी सर्जनात्मक प्रतिभा और साहित्यिक योगदान को देखते हुए इस पाई ताजी उपलब्धि पर तमाम साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षकों तथा अन्य गणमान्य शुभचिंतकों और नागरिकों ने अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

अपने कौन, बेगाने कौन apane kaun, begaane kaun
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रामकेश एम यादव

Ramkesh M Yadav


 

 

Senior litterateur Ramkesh Yadav honored with Shan-e-Hind and Paramveer Samman

 

 

 

Mumbai | [Maharashtra Bulletin] | Dr. Archana Shreya, Kshama Pandey, Krishna Joshi and former soldier Ashok Kumar Jakhar, senior litterateur and royalty poet Ramkesh M. Yadav, who gave a new identity to the soil, simplicity and values ​​​​of the village in his literary journey in Mumbai. He has been decorated with E-Hind and Param Vir Samman.

 

If we look at excluding citations, so far this penman has been awarded with 210 honors and awards. He has shown his creativity in both prose and poetry. Yaad Karo Kurbani, Aao School Chalein, Mazdooran, Mirror of Maharashtra, Sarhad etc. 25 books and more than 1700 of his articles, letter articles, poems, poetry sections, interviews etc. have been published in various newspapers of the country.

 

Two of his works have been included in the syllabus by Maharashtra Text Book Production Department, Pune. During the 1999 Indo-Pak war, he wrote column articles and poems filled with heroic rasa for the encouragement of Indian soldiers.

 

Half a dozen books including Mitti ki Sugandh (poetry) and Jhansi ki Rani Laxmibai (poetry) are about to be published in the coming time. In his works, a deep recognition of the complex and dense realism of village and city life is seen. His simple and easy writing style attracts the readers towards him.

 

He is a native of Tezpur village located in Block Martinganj of Azamgarh district of Uttar Pradesh and retired from the post of teacher in Brihanmumbai Municipal Corporation’s teaching department on March 1, 2019 and is engaged in continuous literary practice. In view of his creative talent and literary contribution, all the litterateurs, journalists, teachers and other eminent well-wishers and citizens have extended their warm wishes on this recent achievement.

समय की मांग | ऑनलाइन बुलेटिन
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