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निगहबानी में रहता हूँ nigahabaanee mein rahata hoon

©भरत मल्होत्रा

परिचय– मुंबई, महाराष्ट्र


 

पल-पल अपने ज़मीर की निगरानी में रहता हूँ

सच्चा हूँ तभी शायद परेशानी में रहता हूँ

 

 

इस गर्दाब से बाहर निकलने की नहीं कोई राह

मैं उसकी आँख में अटके हुए पानी में रहता हूँ

 

 

आलीशान महलों में भी उनको मुश्किलें हैं और

टूटी झोंपड़ी में भी मैं आसानी में रहता हूँ

 

 

बिना जिसकी रज़ा के एक पत्ता भी नहीं हिलता

बस दिन-रात उस रब की निगहबानी में रहता हूँ

 

 

मुझे नफरत की गलियों का पता मालूम कैसे हो

मैं हरदम इश्क के जज़्बा-ए-लासानी में रहता हूँ ….

 

 

भरत मल्होत्रा

Bharat Malhotra


 

 

live under supervision

 

 

I live under the watch of my conscience from time to time
I’m honest, then maybe I’m in trouble

 

There is no way out of this mess
I live in water stuck in his eye

 

They have difficulties even in luxurious palaces and
I live at ease even in a broken hut

 

Without whose grace not a single leaf moves
Just day and night I stay under the watch of that Lord.

 

How do I know the address of the streets of hate
I always live in Ishq’s Jazba-e-Lasani….

 

 

 

 

नूर nor

 

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