.

बरसात barasaat

©अनिता चन्द्राकर, व्याख्याता

परिचय– दुर्ग, छत्तीसगढ़


 

रंग लुटाती, मस्ती छलकाती, आई है बरसात।

काले बादल लेकरआया, ख़ुशियों की बारात।

सौंधी महक मिट्टी की, मिल गई हवा के संग।

झूम रही है डाली डाली, जीवन में आई उमंग।

कोयल गाती गीत मनोहर, लगा थिरकने मोर।

चहक उठे विहग दल, पवनों ने मचाया शोर।

महका उपवन फूलों से, भीगा हर एक कोना।

हरी भरी हो गई धरती, बारिश का रूप सलोना।

कलकल गाती नदियाँ, झर झर झरते हैं झरने।

बच्चों की टोली निकली, लगी नाव अब चलने।

मेघ देते हैं जीवन हमको, प्रकृति की ये सौगात।

रंग लुटाती मस्ती छलकाती, आई है बरसात।

 

 

अनिता चन्द्राकर

Anita Chandrakar

 

 

rain

 

 

 

 

Colors robbed, fun spills over, it’s raining.
Brought black clouds, a procession of happiness.
Fragrant smell of soil, mixed with air.
Dali Dali is swinging, the joy has come in life.
The cuckoo sings the song Manohar, Laga thirkne mor.
The chirping party, the wind made noise.
Every corner drenched with fragrant flowers.
The earth has become green, Salona in the form of rain.
Kalkal sing rivers, Jhar Jhar Jharta Hai waterfalls.
The group of children came out, the boat started running now.
Clouds give us life, this gift of nature.
The fun spills over colours, it is raining.

 

 

 

हम पतझड़ को ही अपना साया बना बैठे ham patajhad ko hee apana saaya bana baithe

 

Related Articles

Back to top button